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क्या बिहार में यही शराबबंदी है? शराब पार्टी करते गांव के वैद्य का वीडियो वायरल

जमुई के एक कथित वैद्य का शराब पीते हुए वीडियो वायरल होने से विवाद खड़ा हो गया है। परिवार ने इसे AI वीडियो बताया, पुलिस जांच में जुटी।

1st Bihar Published by: Dhiraj Kumar Singh Updated Apr 11, 2026, 9:42:56 PM

बिहार न्यूज

शराबबंदी का बनाया मजाक - फ़ोटो सोशल मीडिया

JAMUI: जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड अंतर्गत लोहसिंघानी गांव के रहने वाले एक तथाकथित वैद्य, श्री साहब वैध, इन दिनों विवादों में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपने सहयोगियों के साथ शराब पीते नजर आ रहे हैं। वीडियो में शराब की बोतल भी साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि फर्स्ट बिहार इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता। 


बताया जा रहा है कि यह वीडियो ठंड के मौसम का है, लेकिन इसके वायरल होते ही इलाके में चर्चाओं का दौर गर्म हो गया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि वैद्य अपने समर्थकों के साथ बैठकर जाम से जाम टकरा रहे हैं। ऐसे में बिहार में लागू शराबबंदी कानून के बीच यह मामला गंभीर बन गया है। हालांकि, इस पूरे मामले पर वैध जी के परिवार की ओर से सफाई भी सामने आई है। उनके पुत्र रवि कुमार का कहना है कि यह वीडियो एआई के जरिए बनाया गया है और उनके पिता की छवि खराब करने की साजिश की जा रही है। वायरल इस वीडियो की पुष्टि फर्स्ट बिहार नहीं करता है। 


‘गुरु से सीखी जड़ी-बूटी की विद्या’ का दावा

कथित वैद्य साहब का दावा है कि उन्होंने झारखंड के धनबाद में अपने गुरु के पास 8 वर्षों तक रहकर जड़ी-बूटी की पहचान और उपचार की विधि सीखी है। उनके अनुसार, गुरु के आदेशानुसार उन्होंने 8 साल तक मुफ्त में लोगों का इलाज भी किया।


पड़ोसियों ने खोली पोल

वहीं, उनके ही पड़ोस में रहने वाले कुरहाडीह निवासी मक्केश्वर महतो सहित अन्य ग्रामीणों ने उनके दावों पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वैध जी पहले जंगलों में मवेशी चराते थे और वहीं से पेड़-पौधों को तोड़कर उन्हें दवा बताकर लोगों का इलाज करते थे। कई बार इलाज के बावजूद मरीजों को कोई लाभ नहीं हुआ। यहां तक कि आरोप है कि वे जड़ी-बूटियों में पेनकिलर मिलाकर असर दिखाने की कोशिश करते हैं।


बिना रजिस्ट्रेशन चला रहे क्लीनिक

स्थानीय लोगों के अनुसार, कथित वैद्य के राज्य के विभिन्न जिलों में दर्जनों क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जिनका कोई वैध रजिस्ट्रेशन नहीं है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग उनके पास इलाज के लिए पहुंचते हैं। सोशल मीडिया पर भी उनके इलाज के फायदे के दावे किए जाते रहे हैं।


 जांच में जुटी पुलिस वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो वास्तविक है या एडिटेड, साथ ही शराबबंदी कानून के उल्लंघन के पहलू पर भी जांच की जा रही है।


बड़ा सवाल

इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है अगर कोई व्यक्ति बिना प्रमाणित शिक्षा और रजिस्ट्रेशन के इलाज कर रहा हो और खुद कानून का उल्लंघन करता नजर आए, तो क्या वह लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी उठाने के योग्य है। फिलहाल, पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और जांच के बाद ही सच्चाई पूरी तरह सामने आ सकेगी।


हालांकि इस मामले को लेकर खबर प्रकाशित किए जाने के बाद एक पत्रकार को धमकी भरा कॉल भी आता है और वीडियो डिलीट करने का कहा जाता है नहीं तो अंजाम भुगतने को तैयार रहना कहा जाता है। इस मामले में जमुई सिविल सर्जन अशोक कुमार, बीएएमएस पूरा करने के बाद राज्य आयुर्वेदिक परिषद  में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है।


बिना रजिस्ट्रेशन के आप प्रैक्टिस नहीं कर सकते। रजिस्ट्रेशन के बाद ही आप आयुर्वेदिक चिकित्सक कहलाते हैं। इस मामले में जमुई जिलाधिकारी नवीन सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है वीडियो की जाँच के बात उचित कारवाई की जाएगी साथ ही किसी व्यक्ति द्वारा इनके खिलाफ शिकायत की जाती है तो प्रशासन विधिसम्मत कारवाई करेंगी।


जमुई से धीरज सिंह की रिपोर्ट