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Success Story : बिहार की सबसे युवा सीनियर डिप्टी कलेक्टर: टाटा कंपनी की नौकरी ठुकराकर बनीं BPSC टॉपर

Success Story : बिहार की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक BPSC CCE को रैंक 7 से क्रैक करने वाली अपेक्षा मोदी ने टाटा कंपनी की लाखों रुपये की नौकरी ठुकराकर सीनियर डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना पूरा किया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
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Nitish KumarNitish Kumar|
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Success Story :  बिहार की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक BPSC CCE में रैंक 7 हासिल करने वाली अपेक्षा मोदी की कहानी दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत का उदाहरण है। उन्होंने कम उम्र में ही बिहार में सीनियर डिप्टी कलेक्टर का पद प्राप्त कर लिया, जो किसी भी प्रशासनिक सेवा उम्मीदवार के लिए एक प्रेरणादायक उपलब्धि है।

जो छात्र UPSC या BPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए टॉपर्स की सफलता की कहानियां प्रेरणा का स्रोत होती हैं। इस संदर्भ में अपेक्षा मोदी का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिन्होंने अपने समर्पण और कठिन परिश्रम से यह मुकाम हासिल किया। हालांकि, इस सफलता के पीछे उनका लंबा संघर्ष और समर्पण छिपा है।

झारखंड से बिहार प्रशासनिक सेवा तक का सफर

अपेक्षा मोदी का जन्म झारखंड के कोडरमा जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गृह नगर में ही पूरी की। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग में करियर बनाने का निर्णय लिया और इसके लिए NIAMT (National Institute of Advanced Manufacturing Technology), रांची में दाखिला लिया।

उच्च वेतन वाली नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी

अपेक्षा मोदी ने NIAMT, रांची से B.Tech की डिग्री प्राप्त की। स्नातक की पढ़ाई पूरी होते ही उन्हें टाटा कंपनी में कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से लाखों रुपये के पैकेज पर नौकरी का ऑफर मिला। लेकिन उन्होंने इस सुनहरे अवसर को ठुकरा दिया और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया।

उनका यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन उनकी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास ने उन्हें BPSC CCE परीक्षा में टॉप कराकर बिहार प्रशासनिक सेवा में सीनियर डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंचा दिया। उनकी यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाने का सपना देखते हैं।

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Nitish Kumar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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