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24 हजार छात्रों की छात्रवृत्ति अटकी… SC-ST और BC-OBC आवेदनों में लापरवाही पर 10 DEO पर गिरेगी गाज

Bihar News: बिहार में हजारों छात्रों की छात्रवृत्ति अटकने का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। करीब 24 हजार विद्यार्थियों के आवेदन वर्षों से लंबित हैं, जिस पर शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। कई जिलों के अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती...

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 10, 2026, 11:07:06 AM

24 हजार छात्रों की छात्रवृत्ति अटकी… SC-ST और BC-OBC आवेदनों में लापरवाही पर 10 DEO पर गिरेगी गाज

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Bihar News: बिहार में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग के हजारों छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति अटकने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य के करीब 24 हजार जरूरतमंद विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप का लाभ सिर्फ इसलिए नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि उनके आवेदनों की जांच पिछले दो वर्षों से लंबित पड़ी है। इस गंभीर लापरवाही पर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने जांच में पिछड़ने वाले 10 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) पर कार्रवाई का आदेश देते हुए संबंधित जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है।


शिक्षा विभाग की समीक्षा में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के तहत बड़ी संख्या में आवेदन जिला और संस्थान स्तर पर सत्यापन के इंतजार में पड़े हैं। इन लंबित मामलों के कारण हजारों छात्र छात्रवृत्ति से वंचित हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 


जिन जिलों के DEO की जवाबदेही तय की गई है, उनमें गया, मधुबनी, गोपालगंज, सहरसा, पूर्वी चंपारण, जमुई, दरभंगा, मुंगेर, अररिया समेत कुल 10 जिले शामिल हैं। इन जिलों में आवेदन सत्यापन की गति बेहद धीमी पाई गई, जिसे विभाग ने गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना है।


डॉ. बी. राजेन्दर ने स्पष्ट कहा है कि SC-ST और BC-OBC छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और उप विकास आयुक्तों को निर्देश दिया है कि लंबित आवेदनों की जांच तुरंत पूरी कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


यह छात्रवृत्ति योजना उन विद्यार्थियों के लिए बेहद अहम है, जो मैट्रिक के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। योजना के तहत शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले पात्र छात्र-छात्राओं की फीस और अन्य शैक्षणिक खर्च सरकार वहन करती है। लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है, जब आवेदन का सत्यापन समय पर पूरा हो।


विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग के छात्रों के 2024-25 सत्र में 6089 आवेदन लंबित हैं, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 9620 हो गई है। वहीं SC-ST वर्ग के छात्रों के 2024-25 में 2545 और 2025-26 में 4310 आवेदन अब तक जांच की प्रतीक्षा में हैं। कुल मिलाकर 24 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं प्रभावित हैं।


शिक्षा विभाग ने बताया कि 2022-23 और 2023-24 सत्र में आठ लाख से अधिक छात्रों को इस योजना का लाभ मिला था, जबकि 2024-25 और 2025-26 में अब तक 12 लाख से ज्यादा लाभुकों को राशि जारी की जा चुकी है। इसके बावजूद लंबित आवेदनों की बड़ी संख्या प्रशासनिक ढांचे की कमजोरी उजागर कर रही है।


इस समस्या के समाधान के लिए विभाग ने तकनीकी कमियों को दूर करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। गुरुवार को बेलट्रॉन भवन में संबंधित अधिकारियों और तकनीकी कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सभी जिलों के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा अभियान), पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप से जुड़े तकनीकी कर्मचारी, एनआईसी अधिकारी और शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक कुमार शशि रंजन शामिल हुए।


प्रशिक्षण में आवेदन सत्यापन की प्रक्रिया को तेज और त्रुटिरहित बनाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि तकनीकी बहानों से छात्रवृत्ति भुगतान में देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी।