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EVM news : क्या EVM पर उठे सवाल अब सुलझेंगे? हाई कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश— इतिहास में पहली बार कैंडिडेट के सामने होगी EVM जांच!

चांदीवली चुनाव विवाद में बड़ा मोड़ आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर पहली बार EVM की जांच होगी, जिससे चुनावी पारदर्शिता पर नई बहस शुरू हो गई है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 10, 2026, 11:26:02 AM

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EVM news - फ़ोटो FILE PHOTO

EVM news : भारत में चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के इस्तेमाल के बाद पहली बार ऐसा मामला सामने आया है, जब अदालत के आदेश पर चुनाव के बाद ईवीएम की तकनीकी जांच कराई जाएगी। यह फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस सोमशेखर सुंदरेसन ने सुनाया है, जिसे देश की चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आरिफ नसीम खान ने मुंबई की चांदीवली विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को चुनौती दी थी। इस सीट पर उन्हें दिलीप लांडे के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव में लांडे को 1,24,641 वोट मिले थे, जबकि खान को 1,04,016 वोट प्राप्त हुए थे। इसी परिणाम पर सवाल उठाते हुए खान ने अदालत में याचिका दायर की थी।


12 फरवरी को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित ईवीएम मशीनों की तकनीकी जांच कराई जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब भी इस तरह की जांच की अनुमति दी जाती है, तो चुनाव आयोग को दो महीने के भीतर निरीक्षण प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस फैसले के तहत अब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के इंजीनियरों द्वारा ईवीएम का ‘डायग्नोस्टिक चेक’ किया जाएगा।


मुंबई उपनगर की डिप्टी रिटर्निंग ऑफिसर अर्चना कदम के अनुसार, यह जांच 16 और 17 अप्रैल को की जाएगी। इस दौरान उम्मीदवार और संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में मशीनों की बारीकी से जांच होगी, जो भारत में पहली बार इस तरह की प्रक्रिया मानी जा रही है।


कांग्रेस पार्टी ने पहले ही अपने उम्मीदवारों से कहा था कि वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम और वीवीपैट यूनिट्स की जांच की मांग करें। इस पूरे मामले को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भी पहले ईवीएम में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोप लगा चुके हैं।


आरिफ नसीम खान ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का अप्रैल 2024 फैसला का हवाला देते हुए कहा था कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम 5 फीसदी ईवीएम यूनिट्स—जिनमें कंट्रोल यूनिट, वीवीपैट और बैलेट यूनिट शामिल हैं—की बर्न्ट मेमोरी और माइक्रोकंट्रोलर की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यह फैसला पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।


खान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अब तक किसी भी अदालत ने इस तरह से ईवीएम जांच का आदेश नहीं दिया था, इसलिए यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कम से कम 20 मशीनों की जांच से चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।


गौरतलब है कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन ने 288 में से 230 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी 132 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस को सीमित सफलता मिली थी।इस पूरे घटनाक्रम पर अब देशभर की नजरें टिकी हैं, क्योंकि ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच यह जांच भविष्य में चुनावी सुधारों की दिशा तय कर सकती है।