1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 25, 2026, 9:12:38 AM
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Bihar News : सारण जिले के मशरक थाना क्षेत्र के पचखंडा गांव में रविवार को एक दर्दनाक हादसे में 11 वर्षीय छात्र की पोखरे में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक पहुंचने पर वहां कोई सक्षम चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। आक्रोशित लोगों ने एनएच-227ए रामजानकी पथ को जाम कर जमकर हंगामा किया।
मृतक की पहचान पचखंडा गांव निवासी मंटू शर्मा के पुत्र मनीष कुमार के रूप में हुई है। मनीष केंद्रीय विद्यालय मशरक में वर्ग-4 का छात्र था। बताया जाता है कि वह अपने दोस्तों के साथ गांव के पीछे चंवर की तरफ खेलने गया था। इसी दौरान वह शौच के लिए पोखरे के पास गया। शौच के बाद पानी लेने के दौरान उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में डूब गया।
साथ में मौजूद एक अन्य बच्चे ने जब मनीष को डूबते देखा तो शोर मचाना शुरू कर दिया। बच्चे की आवाज सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी प्रयास के बाद मनीष को पोखरे से बाहर निकाला। आनन-फानन में उसे इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक लाया गया, लेकिन वहां स्थिति बेहद खराब मिली। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उस समय कोई एमबीबीएस चिकित्सक मौजूद नहीं था।
ग्रामीणों का कहना था कि अस्पताल में केवल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कार्यरत एक आयुष चिकित्सक की ड्यूटी लगाई गई थी, जबकि गंभीर मरीजों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की आवश्यकता थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर समय पर डॉक्टर उपलब्ध रहते तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि अस्पताल पहुंचने तक मनीष की मौत हो चुकी थी।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। वहीं अस्पताल प्रभारी के भी मौके पर नहीं रहने से लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल के बाहर जमा हो गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद आक्रोशित लोगों ने एनएच-227ए रामजानकी पथ को जाम कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ महीने पहले सारण डीएम के निरीक्षण के दौरान अस्पताल में चिकित्सकों की शिफ्ट वाइज ड्यूटी तय की गई थी, लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा है। लोगों का कहना था कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो चुकी है और आम लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
करीब कई घंटों तक सड़क जाम रहने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाकर शांत कराया। मशरक थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार तिवारी मौके पर पहुंचे और लोगों को कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद जाम हटाया गया और आवागमन सामान्य हो सका।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल छपरा भेज दिया है। वहीं गांव में इस घटना के बाद मातम का माहौल है। बताया जा रहा है कि मनीष दो भाइयों में बड़ा था। बेटे की मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी इस हादसे से काफी दुखी हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।