1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 13, 2026, 5:49:35 PM
टीचर की भूमिका में डीएम साहब - फ़ोटो रिपोर्टर
MOTIHARI:बिहार के विभिन्न जिलों में प्राइवेट स्कूलों द्वारा अवैध वसूली और महंगी किताबों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में भी यह मुद्दा काफी तूल पकड़ चुका है। इसी बीच मोतिहारी के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक अहम पहल की है।
इस नई व्यवस्था के तहत जिले के सभी अधिकारियों को सरकारी विद्यालय “गोद” दिया जाएगा। जिन अधिकारियों को जितने विद्यालय सौंपे जाएंगे, उन्हें महीने में दो-तीन बार उन स्कूलों का दौरा कर यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर माहौल मिल रहा है या नहीं।
सिर्फ निरीक्षण ही नहीं, बल्कि अधिकारियों को स्कूल में जाकर बच्चों की कक्षाएं भी लेनी होंगी और उनकी पढ़ाई का स्तर समझना होगा। साथ ही छात्रों की प्रगति रिपोर्ट का भी आकलन करना होगा। इस पहल की शुरुआत खुद जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने की। वे एक सरकारी विद्यालय पहुंचे और शिक्षकों की मौजूदगी में बच्चों को पढ़ाया, उनसे सवाल पूछे और उनके जवाब सुने। इसके आधार पर उन्होंने यह आकलन किया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो रहा है और अभिभावक अपने बच्चों को यहां पढ़ाने पर विचार कर सकते हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि सभी अधिकारियों को अलग-अलग विद्यालयों की जिम्मेदारी दी जाएगी, जहां वे पूरे वर्ष रोटेशन के आधार पर निरीक्षण करेंगे। वर्ष के अंत में हर अधिकारी को संबंधित विद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें छात्रों के शैक्षणिक विकास का मूल्यांकन किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना और अभिभावकों का भरोसा मजबूत करना है, ताकि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के लिए प्रेरित हों।
मोतिहारी से सोहराब आलम की रिपोर्ट