ब्रेकिंग
अफवाहों से बढ़ी घबराहट, पानी की टंकी में पेट्रोल भरवाने पहुंच गया युवक, लोग बनाने लगे वीडियो UCC पर डॉ प्रेम कुमार का बड़ा बयान, बोले- ‘एक देश, एक कानून’ पूरे भारत में लागू होमंत्री अशोक चौधरी बने असिस्टेंट प्रोफेसर, पटना के एएन कॉलेज में ली पहली क्लासनीतीश कुमार पर प्रशांत किशोर ने बोला बड़ा हमला, कहा..अब JDU भी परिवारवाद से अछूता नहीं रहा हाजीपुर में निगरानी की बड़ी कार्रवाई, 50 हजार घूस लेते खनन विभाग के दो कर्मचारी रंगेहाथ गिरफ्तारअफवाहों से बढ़ी घबराहट, पानी की टंकी में पेट्रोल भरवाने पहुंच गया युवक, लोग बनाने लगे वीडियो UCC पर डॉ प्रेम कुमार का बड़ा बयान, बोले- ‘एक देश, एक कानून’ पूरे भारत में लागू होमंत्री अशोक चौधरी बने असिस्टेंट प्रोफेसर, पटना के एएन कॉलेज में ली पहली क्लासनीतीश कुमार पर प्रशांत किशोर ने बोला बड़ा हमला, कहा..अब JDU भी परिवारवाद से अछूता नहीं रहा हाजीपुर में निगरानी की बड़ी कार्रवाई, 50 हजार घूस लेते खनन विभाग के दो कर्मचारी रंगेहाथ गिरफ्तार

16 साल पुराने रिश्वतखोरी मामले में ASI और दलाल दोषी करार, निगरानी कोर्ट ने सुनाई सजा

Patna की निगरानी कोर्ट ने 2009 के रिश्वतखोरी मामले में गिरियक थाने के तत्कालीन एएसआई और एक दलाल को दोषी ठहराया। दोनों को एक-एक वर्ष सश्रम कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।

बिहार न्यूज
निगरानी कोर्ट का फैसला
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
|
|AMP
विज्ञापन — Rectangle

PATNA: 16 साल पहले 2009 में नालंदा के गिरियक थाने के तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक नरेश प्रसाद और दलाल नरेश प्रसाद पर एक कांड में गिरफ्तारी के लिए रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। दोनों आरोपी को 10 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में निगरानी कोर्ट ने आज फैसला सुनाया है। 


निगरानी कोर्ट के न्यायाधीश मोहम्मद रूस्तम ने दोनों को दोषी ठहराया है। दोनों आरोपियों को एक-एक साल सश्रम कारावास और 20-20 हजार रूपये का अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड की राशि जमान नहीं करने पर एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास होगा। 


निगरानी कोर्ट ने थाना कांड संख्या 113/09 (विशेष वाद संख्या 90/09) में दोषी ठहराया। शिकायतकर्ता नालंदा के गिरियक स्थित पावापुरी मोड़ निवासी राज कुमार राम ने कांड में गिरफ्तारी के लिए घूस मांगने का आरोप लगाया था। दोनों आरोपियों को 10 हजार रुपये घूस लेते निगरानी ने गिरफ्तार किया था।  


इस मामले का तत्कालीन अनुसंधानकर्त्ता पुलिस उपाधीक्षक, विजय कुमार श्रीवास्तव, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा सटीक और समय पर आरोप-पत्र दायर किया। बिहार सरकार की ओर से रितेश कुमार, विशेष लोक अभियोजक, निगरानी (ट्रैप केसेज) पटना ने प्रभावी तरीके से पैरवी की और आरोपी को दोष सिद्ध कराने में सफलता हासिल की। 


नरेश प्रसाद, तत्का0 सहायक अवर निरीक्षक, थाना- गिरियक, जिला- नालन्दा एवं नरेश प्रसाद (दलाल) को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 में एक वर्ष सश्रम कारावास एवं 20,000/-(बीस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। धारा-13(2) सह पठित धारा- 13(1)(क) में एक वर्ष सश्रम कारावास एवं 20,000/- (बीस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। 


अर्थदण्ड की राशि नहीं जमा करने पर एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास होगा।  वर्ष 2026 में माननीय न्यायालय द्वारा भ्रष्टाचार के मामले में सुनाई गई यह तीसरा सजा है। ये दोषसिद्ध की कार्रवाई मो0 रूस्तम, माननीय न्यायाधीश, निगरानी के न्ययालय पटना द्वारा की गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अभियोजन की कार्यवाही लगातार जारी है।

इस खबर के बारे में

रिपोर्टर / लेखक

Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

विज्ञापन

संबंधित खबरें