1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 14, 2026, 11:18:26 AM
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Bihar Highway Project : बिहार के लिए एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धि सामने आई है। वाराणसी से कोलकाता को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित छह लेन सड़क परियोजना (एनएच-319बी) के निर्माण का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। लंबे समय से अटके इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार ने वित्तीय मंजूरी दे दी है, जिससे अब इसके अधूरे हिस्सों पर भी तेजी से काम शुरू हो सकेगा। यह सड़क उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर के रूप में विकसित होगी।
इस परियोजना के तहत पहले कुल सात पैकेज बनाए गए थे, जिनमें से पांच पैकेज पर काम पहले से ही जारी था। लेकिन रोहतास जिले में स्थित पैकेज चार और पांच तकनीकी और पर्यावरणीय कारणों से अटके हुए थे। अब केंद्र सरकार ने इन दोनों पैकेज को मिलाकर एक नया पैकेज तैयार किया है और उसे भी मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद परियोजना में आ रही बड़ी बाधा दूर हो गई है।
दरअसल, पैकेज चार में वन क्षेत्र से होकर गुजरने के कारण एक टनल बनाने की योजना थी। लेकिन वन विभाग ने ब्लास्टिंग की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिससे टनल निर्माण संभव नहीं हो पाया। इसके विकल्प के तौर पर टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) से निर्माण का प्रस्ताव आया, लेकिन इससे लागत दो से तीन गुना बढ़ जाती, जिस पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने आपत्ति जताई। अंततः नए सिरे से डिजाइन तैयार किया गया और सड़क को वन क्षेत्र से बाहर सासाराम शहर के समीप से ले जाने का निर्णय लिया गया।
इस बदलाव के कारण सड़क की लंबाई लगभग 15 किलोमीटर बढ़ गई है। अब यह सड़क कोनकी गांव से लेरुआ गांव तक करीब 41.955 किलोमीटर तक फैली होगी। इस नए पैकेज को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत बनाया जाएगा, जिसमें 40 फीसदी लागत सरकार और 60 फीसदी निर्माण एजेंसी वहन करेगी। निर्माण एजेंसी बाद में टोल वसूली के जरिए अपनी लागत की भरपाई करेगी।
इस पैकेज के तहत सोन नदी पर 3.5 किलोमीटर लंबा एक बड़ा पुल भी बनाया जाएगा, जो इस परियोजना का प्रमुख आकर्षण होगा। इसके अलावा छह छोटे पुलों का भी निर्माण प्रस्तावित है। इस पूरे हिस्से के निर्माण पर लगभग 2897.16 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सड़क निर्माण के लिए कुल 310.77 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी, जिसमें 24.82 हेक्टेयर सरकारी भूमि शामिल है।
परियोजना के विभिन्न पैकेजों की बात करें तो पहला और दूसरा पैकेज कैमूर जिले में है, जिसकी लंबाई क्रमशः 27-27 किलोमीटर है। तीसरा पैकेज कैमूर और रोहतास में 36 किलोमीटर का है। छठा पैकेज औरंगाबाद में 35.2 किलोमीटर और सातवां पैकेज गया जिले में 33.5 किलोमीटर लंबा है। इन सभी पांच पैकेजों पर काम पहले से चल रहा है।
इस सड़क के निर्माण से यात्रा समय में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। वर्तमान में वाराणसी से कोलकाता तक की दूरी तय करने में लगभग 14 घंटे का समय लगता है, जो इस सड़क के बनने के बाद घटकर महज 6 से 7 घंटे रह जाएगा। इससे न सिर्फ लोगों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि माल परिवहन भी तेज और सस्ता होगा।
खास बात यह है कि यह सड़क हल्दिया बंदरगाह तक कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, जिससे बिहार सहित पूरे पूर्वी भारत के व्यापार को नया आयाम मिलेगा। उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी इससे बढ़ावा मिलेगा।
कुल मिलाकर, एनएच-319बी परियोजना बिहार के लिए विकास की नई राह खोलने वाली साबित हो सकती है। यह न सिर्फ राज्यों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी गति देगी।