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Supreme Court : सभी इमरजेंसी नंबर अब होंगे एक, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: 3 महीने में ‘112’ से जुड़ेगी हर हेल्पलाइन

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों को 112 से जोड़ने का आदेश दिया है। अब पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस जैसी सेवाएं एक ही नंबर पर उपलब्ध होंगी।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 29, 2026, 7:22:37 AM

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Supreme Court - फ़ोटो Ai photo

Supreme Court : सभी इमरजेंसी नंबर अब होंगे एक, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: 3 महीने में ‘112’ से जुड़ेगी हर हेल्पलाइन


देश में आपातकालीन स्थिति के दौरान मदद मांगने के लिए अब लोगों को अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अगले तीन महीने के भीतर सभी इमरजेंसी और एंबुलेंस सेवाओं को एकीकृत कर ‘112’ नंबर से जोड़ें। अदालत ने साफ कहा कि आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिलना नागरिकों के मौलिक अधिकारों में शामिल है।


सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि समय पर ट्रॉमा केयर और इमरजेंसी सहायता उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालत ने माना कि मौजूदा समय में अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर होने से आम लोगों को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता है, जिससे कई बार मदद मिलने में देरी हो जाती है।


कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अब देशभर में इमरजेंसी सेवाओं के लिए एक समान और सरल व्यवस्था लागू करने की जरूरत है। इसी के तहत पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और महिलाओं की सुरक्षा जैसी सभी आपातकालीन सेवाओं को एक ही नंबर ‘112’ से जोड़ने का निर्देश दिया गया है।


सुप्रीम कोर्ट ने जिन हेल्पलाइन नंबरों को 112 में शामिल करने की बात कही है, उनमें 100 (पुलिस), 101 (फायर ब्रिगेड), 102 और 108 (एम्बुलेंस सेवा), 1033 (हाईवे इमरजेंसी सहायता) और 1091 (महिला हेल्पलाइन) प्रमुख हैं। अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी और संचालन स्तर पर इन सभी सेवाओं का इंटीग्रेशन सुनिश्चित करने को कहा है।


इसके साथ ही कोर्ट ने सरकारों को निर्देश दिया कि वे ‘हेल्पलाइन 112’ के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार करें। अदालत ने कहा कि टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया और अन्य जनसंचार माध्यमों के जरिए आम लोगों तक यह जानकारी पहुंचाई जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिक तुरंत 112 नंबर पर संपर्क कर सकें।


सुप्रीम कोर्ट ने केवल हेल्पलाइन नंबरों के एकीकरण तक ही अपने निर्देश सीमित नहीं रखे, बल्कि सड़क हादसों में मदद करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे ‘गुड समैरिटन कानून’ के तहत प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली तैयार करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।


इसके अलावा अदालत ने केंद्र सरकार को भी अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को तीन महीने के भीतर ट्रॉमा और हादसों से जुड़े मामलों के लिए एक विस्तृत ‘मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल’ तैयार करने और जारी करने की अनुमति दी है। यह प्रोटोकॉल देशभर में इमरजेंसी मेडिकल रिस्पॉन्स सिस्टम को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जाएगा।


कोर्ट ने कहा कि जैसे ही केंद्र सरकार यह प्रोटोकॉल जारी करेगी, उसके बाद अगले तीन महीने के भीतर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसे लागू करना होगा। अदालत ने सभी राज्यों से आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी निर्धारित समय के भीतर सौंपने को कहा है।


सुप्रीम Court के इस फैसले को देश में इमरजेंसी सेवाओं को अधिक प्रभावी, तेज और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ लोगों को आपात स्थिति में तुरंत मदद मिलेगी, बल्कि देशभर में ट्रॉमा केयर और रेस्क्यू सिस्टम को भी मजबूत किया जा सकेगा।