Hindi News / bihar / patna-news / पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 283 अभ्यर्थियों की दारोगा नियुक्ति पर लगी रोक;...

पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 283 अभ्यर्थियों की दारोगा नियुक्ति पर लगी रोक; क्या है पूरा मामला?

Patna High Court News: पटना हाईकोर्ट ने 283 अभ्यर्थियों की दारोगा नियुक्ति पर रोक लगाते हुए एकलपीठ का फैसला पलट दिया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त 133 अभ्यर्थियों की तुलना नहीं की जा सकती।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 29, 2026, 8:35:21 AM

Patna High Court News

पटना हाई कोर्ट का फैसला - फ़ोटो Google

Patna High Court News: पटना हाईकोर्ट ने बिहार पुलिस में दारोगा बनने का सपना देख रहे 283 अभ्यर्थियों को बड़ा झटका देते हुए उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी है। जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले को पलटते हुए यह आदेश जारी किया।


पहले एकलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि मेडिकल जांच में फिट पाए गए अभ्यर्थियों को 6 सप्ताह के भीतर दारोगा पद पर नियुक्त किया जाए। लेकिन राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए डबल बेंच में एलपीए (अपील) दाखिल किया। लंबी सुनवाई के बाद मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 42 पेज का विस्तृत आदेश जारी कर एकलपीठ के फैसले को निरस्त कर दिया।


कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन 133 अभ्यर्थियों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर की गई थी, उनकी तुलना इन अभ्यर्थियों से नहीं की जा सकती। साथ ही यह भी कहा गया कि नियुक्ति प्रक्रिया वर्ष 2023 और 2024 में समाप्त हो चुकी है, इसलिए अब इसमें हस्तक्षेप उचित नहीं है।


यह मामला विज्ञापन संख्या 704/2004 से जुड़ा है, जिसमें बिहार सरकार ने 1510 सब-इंस्पेक्टर पदों के लिए भर्ती निकाली थी। भर्ती प्रक्रिया के तहत 2006 में शारीरिक परीक्षा, 2008 में लिखित परीक्षा और 2008 में ही अंतिम परिणाम घोषित किया गया था। बाद में प्रश्न पत्र में त्रुटियों और पुनर्मूल्यांकन के कारण कई बदलाव हुए और 160 चयनित अभ्यर्थियों को हटाया भी गया, जिन्हें बाद में सरकार ने बनाए रखने का निर्णय लिया था।


इसी भर्ती विवाद से जुड़े कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया था और 133 अभ्यर्थियों को मेडिकल फिटनेस टेस्ट के आधार पर नियुक्ति देने का आदेश दिया था। इन्हीं आदेशों के आधार पर उनकी बहाली हुई थी।


हालांकि, 283 अभ्यर्थियों ने इसी आधार पर समानता के अधिकार का हवाला देते हुए नियुक्ति की मांग की थी, जिसे पुलिस विभाग ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश केवल विशेष श्रेणी के अभ्यर्थियों पर लागू था। हाईकोर्ट ने भी इसी तर्क को स्वीकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।