1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 14, 2026, 8:23:25 AM
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Bihar Expressway : बिहार में आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। Nitish Kumar के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। इसी क्रम में पटना-बेतिया एक्सप्रेस-वे परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसका पहला खंड अब अप्रैल 2027 तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद राजधानी पटना से बेतिया की दूरी महज तीन घंटे में तय की जा सकेगी, जो फिलहाल काफी अधिक समय लेती है।
सोमवार को मुख्यमंत्री ने सारण जिले के बकरपुर-मानिकपुर सड़क मार्ग पर रुककर इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेस-वे के पहले चरण के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि परियोजना को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए और गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक्सप्रेस-वे बिहार की प्रमुख कनेक्टिविटी परियोजनाओं में से एक है, जो राज्य के विकास को नई दिशा देगा।
पटना-बेतिया एक्सप्रेस-वे एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जिसका मतलब है कि इसे पूरी तरह नई जमीन पर विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के जरिए वैशाली, सारण, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जैसे जिलों को सीधे पटना से जोड़ा जाएगा। इससे न सिर्फ यात्रा का समय घटेगा बल्कि इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। खासकर उत्तर बिहार के लोगों के लिए यह परियोजना किसी वरदान से कम नहीं होगी, क्योंकि इससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी।
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने जानकारी दी कि परियोजना का काम तेजी से चल रहा है और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार पहले चरण को अप्रैल 2027 तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी तरह की समस्या न हो।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने बाकरपुर-मानिकपुर फोरलेन सड़क परियोजना का भी जायजा लिया। इसके अलावा उन्होंने जेपी सेतु के समानांतर बन रहे नए पुल का भी निरीक्षण किया। इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य पटना और आसपास के इलाकों में यातायात के दबाव को कम करना और बेहतर यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना है। इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, सचिव कुमार रवि, विशेष कार्य पदाधिकारी डॉ. गोपाल सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
वहीं दूसरी ओर, ग्रामीण कार्य विभाग भी राज्य की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। विभाग ने 9 से 11 अप्रैल के बीच राज्य की करीब 2000 ग्रामीण सड़कों का निरीक्षण कराया। इसके लिए 82 अधिकारियों की टीम गठित की गई थी। इस जांच में जिन सड़कों की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई, उनके ठेकेदारों को सात दिनों के भीतर सुधार करने का निर्देश दिया गया है।
विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर निर्धारित समय के भीतर खामियों को दूर नहीं किया गया, तो संबंधित संवेदक का अनुबंध ‘रिस्क एंड कॉस्ट’ पर रद्द कर दिया जाएगा। इसके अलावा, जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। यह कदम राज्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
सरकार ने सभी गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया है कि वे हर महीने कम से कम 20 निर्माणाधीन सड़कों और पुलों की गहन जांच करें। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि भविष्य में बनने वाली सड़कें टिकाऊ और सुरक्षित हों।
कुल मिलाकर देखा जाए तो पटना-बेतिया एक्सप्रेस-वे और अन्य सड़क परियोजनाएं बिहार के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राज्य में न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नया बल मिलेगा। बिहार के लोगों के लिए यह वास्तव में एक अच्छी खबर है, जो आने वाले समय में उनके जीवन को और आसान बनाएगी।