1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 15, 2026, 3:48:40 PM
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Nitish Kumar : बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया और अब वह राज्यसभा सांसद बनें हैं। इसी बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उन्हें कितनी पेंशन मिलेगी और क्या सांसद बनने के बाद वे यह पेंशन प्राप्त कर सकेंगे या नहीं।
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर थे, तब उन्हें हर महीने लगभग 2.15 लाख रुपये तक वेतन मिलता था। इसके अलावा उन्हें कई सरकारी सुविधाएं भी प्राप्त थीं, जिनमें सरकारी आवास, सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ, यात्रा भत्ता और चिकित्सा सुविधाएं शामिल थीं। मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें राज्य सरकार की ओर से उच्च स्तरीय प्रोटोकॉल और प्रशासनिक सहयोग भी दिया जाता था।
अब सवाल यह उठता है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद पूर्व सीएम को कितनी पेंशन मिलती है। सामान्य नियमों के अनुसार, बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों को उनके कार्यकाल और सेवा अवधि के आधार पर पेंशन दी जाती है। यह पेंशन हर महीने तय राशि के रूप में होती है और वर्षों के हिसाब से इसमें वृद्धि भी हो सकती है। लंबे समय तक पद पर रहने वाले नेताओं को अपेक्षाकृत अधिक पेंशन मिलती है।
हालांकि, नियम यह भी स्पष्ट करते हैं कि कोई भी व्यक्ति एक साथ सरकारी वेतन और पेंशन दोनों का लाभ नहीं ले सकता। यदि कोई व्यक्ति किसी संवैधानिक पद या सरकारी पद पर कार्यरत है और उसे वेतन मिल रहा है, तो उस अवधि में उसकी पेंशन को या तो रोक दिया जाता है या स्थगित कर दिया जाता है।
यदि नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद बनते हैं, तो उन्हें सांसद के रूप में भी वेतन और भत्ते मिलेंगे। राज्यसभा सांसद के तौर पर उन्हें लगभग 1.24 लाख से 1.25 लाख रुपये मासिक वेतन मिलता है। इसके अलावा संसद सत्र के दौरान 2,500 रुपये प्रतिदिन भत्ता भी दिया जाता है। साथ ही उन्हें कार्यालय व्यय, स्टाफ भत्ता, टेलीफोन, आवास और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनकी कुल राशि प्रतिमाह लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।
ऐसे में नियमों के अनुसार, जब वे सांसद के रूप में वेतन प्राप्त कर रहे होंगे, तब उनकी पूर्व मुख्यमंत्री पेंशन फिलहाल स्थगित कर दी जाएगी। सरकारी नियम यह भी कहते हैं कि पेंशन प्राप्त करने के लिए यह घोषणा करना आवश्यक होता है कि संबंधित व्यक्ति किसी सरकारी पद पर कार्यरत नहीं है और किसी भी प्रकार का सरकारी वेतन नहीं ले रहा है।
इस स्थिति में यदि वे सक्रिय रूप से राज्यसभा सांसद के रूप में कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें केवल सांसद का वेतन और भत्ते ही मिलेंगे। पेंशन का लाभ उस अवधि में नहीं दिया जाएगा। हालांकि, भविष्य में जब वे किसी भी सरकारी पद पर नहीं रहेंगे, तब उनकी पेंशन पुनः शुरू हो सकती है।
बिहार की राजनीति में इस तरह के बदलाव अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं, क्योंकि इससे न केवल राजनीतिक समीकरण बदलते हैं बल्कि पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों की सुविधाओं और लाभों पर भी प्रभाव पड़ता है। नीतीश कुमार जैसे अनुभवी नेता के मामले में यह विषय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि उनका राजनीतिक अनुभव और लंबा कार्यकाल उन्हें विशेष श्रेणी में रखता है।
कुल मिलाकर, नियम साफ है कि एक समय में केवल एक ही सरकारी लाभ लिया जा सकता है—या तो वेतन या पेंशन। इसलिए राज्यसभा सांसद बनने के बाद उनकी मुख्यमंत्री पेंशन फिलहाल रोक दी जाएगी और उन्हें केवल सांसद के वेतन व भत्तों का लाभ मिलेगा।