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NEET Scam : कमरा नंबर 501 और 503 बना NEET पेपर लीक का राजदार, 60 लाख की डील के सुराग तलाश रही CBI

NEET UG-2026 पेपर लीक मामले में CBI ने बिहार के पावापुरी मेडिकल कॉलेज में बड़ी कार्रवाई की। कमरा नंबर 503 और 110 में छापेमारी के दौरान सॉल्वर गैंग, 60 लाख की डील और 2.95 लाख कैश से जुड़े अहम सुराग मिले हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 14, 2026, 7:56:43 AM

NEET Scam : कमरा नंबर 501 और 503 बना NEET पेपर लीक का राजदार, 60 लाख की डील के सुराग तलाश रही CBI

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NEET Scam :  नीट यूजी-2026 परीक्षा रद्द होने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बिहार में सामने आए पेपर लीक कांड की जांच तेज कर दी है। सीबीआई की दो सदस्यीय टीम नालंदा जिले स्थित पावापुरी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंची, जहां कथित सॉल्वर गैंग से जुड़े छात्रों के कमरों की गहन तलाशी ली गई। जांच एजेंसियों की इस कार्रवाई से मेडिकल कॉलेज परिसर में पूरे दिन हलचल बनी रही।


सीबीआई टीम ने सबसे पहले कॉलेज के इंटर्न हॉस्टल में पहुंचकर आरोपी छात्र उज्ज्वल कुमार उर्फ राजा बाबू के कमरे की जांच की। कमरा बंद होने के कारण अधिकारियों ने ड्रिल मशीन और कटर की मदद से ताला तुड़वाया। इसके बाद करीब दो घंटे तक कमरे की बारीकी से तलाशी ली गई। हालांकि शुरुआती जांच में किसी बड़े आपत्तिजनक सामान के मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच के दौरान स्थानीय पुलिस भी टीम के साथ मौजूद रही।


जांच एजेंसी ने इसके बाद टाइफार्ड कैंपस में स्थित अन्य कमरों की भी जांच की। यहां अवधेश कुमार और अमन कुमार से जुड़े कमरा नंबर 501, 502 और 503 को खंगाला गया। सूत्रों के मुताबिक कमरा नंबर 503 में जांच अधिकारी काफी देर तक मौजूद रहे और वहां रखे दस्तावेजों, मोबाइल फोन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की विस्तार से जांच की गई। सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक नेटवर्क का संचालन किस स्तर से किया जा रहा था और इसके तार किन-किन राज्यों तक फैले हुए हैं।


बताया जा रहा है कि पावापुरी मेडिकल कॉलेज का द्वितीय वर्ष का छात्र अवधेश कुमार इस पूरे गिरोह का अहम सदस्य है। वह फिलहाल जेल में बंद है। वहीं कॉलेज का ही एक अन्य छात्र उज्ज्वल उर्फ राजा बाबू फरार बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों को सॉल्वर गैंग का मुख्य संचालक माना जा रहा है। आरोप है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से 50 से 60 लाख रुपये तक की डील की जाती थी।


इस मामले का खुलासा दो मई की रात उस समय हुआ था जब नालंदा पुलिस ने परीक्षा से एक दिन पहले दो वाहनों में सवार तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार लोगों में अवधेश कुमार और उज्ज्वल का मौसेरा भाई अमन कुमार भी शामिल था। पुलिस ने इनके पास से करीब 2.95 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। पूछताछ के आधार पर बाद में चार अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया।


पुलिस की गिरफ्त में आए अन्य आरोपियों में सीतामढ़ी निवासी हर्ष राज, मुजफ्फरपुर के पंकज कुमार और मनोज कुमार के अलावा मोतिहारी निवासी अमन कुमार शामिल हैं। अब सीबीआई सभी सात आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रश्नपत्र लीक कैसे हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।


सीबीआई टीम ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन और जूनियर डॉक्टरों से भी पूछताछ की। कॉलेज से जुड़े कई दस्तावेजों को खंगाला गया और छात्रों की गतिविधियों से संबंधित जानकारियां जुटाई गईं। हालांकि देर शाम तक किसी नई गिरफ्तारी या बड़ी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।


कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सर्विला कुमारी अवकाश पर थीं, जिसके कारण अस्पताल अधीक्षक डॉ. जकी अनवर जमां पूरे समय जांच टीम के साथ मौजूद रहे। उन्होंने जांच एजेंसियों को आवश्यक सहयोग देने की बात कही। फिलहाल सीबीआई और स्थानीय पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों और संभावित नेटवर्क की तलाश में जुटी हुई है।


नीट यूजी-2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच नाराजगी देखी जा रही है। ऐसे में सीबीआई की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।