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BIHAR NEWS : कभी थे खून के प्यासे दुश्मन, अब संन्यास से पहले करा रहे महादंगल! जानिए अनंत–विवेका की हैरान कर देने वाली कहानी

बिहार के अखाड़ों में कभी एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले अनंत और विवेका पहलवान आज दोस्ती की मिसाल बन गए हैं। खून के प्यासे कहे जाने वाले ये दोनों अब संन्यास से पहले एक बड़े महादंगल का आयोजन कर रहे हैं, जिसे लेकर इलाके में जबरदस्त उत्साह है।

BIHAR NEWS : कभी थे खून के प्यासे दुश्मन, अब संन्यास से पहले करा रहे महादंगल! जानिए अनंत–विवेका की हैरान कर देने वाली कहानी
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BIHAR NEWS : बिहार के मोकामा से बाहुबली राजनीति, पुरानी दुश्मनी और अब एक बड़े कुश्ती आयोजन को लेकर फिर से राजनीतिक और सामाजिक माहौल गर्म है। जेडीयू के बाहुबली विधायक अनंत कुमार सिंह हाल ही में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद पटना स्थित बेऊर जेल से बाहर आए हैं और बाहर आते ही वह एक बड़े आयोजन को लेकर सुर्खियों में हैं। यह आयोजन उनके पुराने जानी दुश्मन रहे दिवंगत पहलवान विवेका पहलवान की स्मृति में किया जा रहा है।


मोकामा के नदवां गांव में आयोजित इस “महादंगल” को अंतरराष्ट्रीय स्तर का कुश्ती आयोजन बताया जा रहा है, जिसमें भारत ही नहीं बल्कि विदेशों के पहलवान भी हिस्सा ले रहे हैं। लेकिन इस आयोजन की सबसे बड़ी चर्चा इसकी पृष्ठभूमि है, जिसमें दशकों पुरानी दुश्मनी, हिंसा और गैंगवार का इतिहास शामिल है।


अनंत सिंह और विवेका पहलवान की पुरानी दुश्मनी

मोकामा और बाढ़ के टाल इलाके में कभी अनंत कुमार सिंह और विवेका पहलवान के बीच वर्चस्व की लड़ाई बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच गई थी। दोनों पक्षों के बीच कई बार आमने-सामने संघर्ष हुआ और गोलीबारी की घटनाएं भी सामने आईं। यह संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय दबदबे से जुड़ा हुआ माना जाता था।


विवेका पहलवान, जिनका असली नाम विवेक सिंह बताया जाता है, कुश्ती की दुनिया में बड़ा नाम थे। वे बिहार केसरी का खिताब जीत चुके थे और इलाके में उनका काफी प्रभाव था। उनके भाई अरविंद भी पहलवान रहे हैं और परिवार का स्थानीय अखाड़ों में मजबूत दबदबा माना जाता था। दूसरी ओर अनंत सिंह भी मोकामा-बाढ़ क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव रखने वाले नेता के रूप में उभरे। दोनों के बीच टकराव समय के साथ इतना बढ़ा कि यह व्यक्तिगत और पारिवारिक दुश्मनी में बदल गया।


गोलियों से भरा संघर्ष और हिंसक घटनाएं

स्थानीय रिपोर्टों और पुराने घटनाक्रमों के अनुसार, दोनों गुटों के बीच लंबे समय तक हिंसक संघर्ष चलता रहा। बताया जाता है कि कई बार दोनों पक्षों के बीच खुलकर फायरिंग हुई और कई लोगों की जान भी गई 1995 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी अनंत सिंह के आवास पर हमला हुआ था, जिसमें भारी गोलीबारी की घटनाएं हुईं। इस दौरान परिवार के कुछ सदस्य भी प्रभावित हुए। कहा जाता है कि उस समय टाल इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी।2004 में अनंत सिंह पर एक जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें उन्हें कई गोलियां लगी थीं लेकिन वे किसी तरह बच गए थे। इस हमले का आरोप विवेका पहलवान के गुट पर लगाया गया था।


इसके बाद भी गैंगवार जारी रहा और एक के बाद एक हत्याओं की घटनाएं सामने आती रहीं। बताया जाता है कि विवेका पहलवान के भाई संजय सिंह की हत्या सरकारी दफ्तर में कर दी गई थी, जबकि कुछ समय बाद अनंत सिंह के बड़े भाई फाजो सिंह की हत्या हुई। इन घटनाओं ने दोनों गुटों के बीच दुश्मनी को और गहरा कर दिया।


पारिवारिक नुकसान और लंबे समय तक तनाव

इस संघर्ष में दोनों पक्षों ने अपने परिजनों को भी खोया। अनंत सिंह के बड़े भाई फाजो सिंह और विरंची सिंह की हत्या गैंगवार में हुई बताई जाती है। वहीं विवेका पहलवान के भाई संजय सिंह की हत्या ने उनके परिवार को बड़ा झटका दिया। इन घटनाओं के बाद मोकामा और आसपास के इलाकों में लंबे समय तक तनाव और डर का माहौल बना रहा। कई परिवार इस हिंसा की चपेट में आए और क्षेत्र में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई लगातार चर्चा में बनी रही।


बदलते हालात और आपसी नज़दीकी

समय के साथ दोनों गुटों के बीच हालात बदलने लगे। दशकों पुरानी दुश्मनी धीरे-धीरे शांत होती दिखी और दोनों पक्षों के बीच सामाजिक और राजनीतिक संपर्क भी शुरू हुआ। यहां तक कि विवेका पहलवान कभी अनंत कुमार सिंह के आवास पर भी पहुंचे और पुराने विवादों को खत्म करने की बात कही। मोकामा उपचुनाव के दौरान, जब अनंत सिंह जेल में थे, तब भी विवेका पहलवान ने उनके समर्थन में प्रचार किया था। यह उस लंबे संघर्ष के बाद एक अलग राजनीतिक तस्वीर पेश करता है।


विवेका पहलवान की विरासत और कुश्ती

विवेका पहलवान मोकामा और बाढ़ के टाल इलाके में कुश्ती के बड़े नामों में शामिल थे। उनका पूरा परिवार कुश्ती और अखाड़े से जुड़ा रहा। वे बिहार केसरी भी रह चुके थे और स्थानीय स्तर पर उनका प्रभाव काफी मजबूत था। उनकी याद में अब जो महादंगल आयोजित किया जा रहा है, वह उनके खेल जीवन और इलाके में उनकी पहचान को समर्पित बताया जा रहा है।


अंतरराष्ट्रीय महादंगल और आयोजन की तैयारी

नदवां गांव में आयोजित इस महादंगल में ईरान के पहलवान हामिद, इरफान और जलाल सहित जॉर्जिया के टेड्डू पहलवान हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से भी कई नामी पहलवान शामिल हो रहे हैं। अखाड़े को विशेष रूप से तैयार किया गया है। लाल मिट्टी मंगाकर उसमें हल्दी, नीम और सरसों का तेल मिलाया गया है ताकि पारंपरिक कुश्ती की भावना और बेहतर माहौल बनाया जा सके। आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर का रूप देने की कोशिश की गई है।


राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र

इस आयोजन ने मोकामा में राजनीतिक चर्चा को फिर से तेज कर दिया है। एक तरफ लोग इसे खेल और संस्कृति का बड़ा आयोजन मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसकी पृष्ठभूमि में छिपी पुरानी दुश्मनी और गैंगवार की यादें भी ताजा हो गई हैं।अनंत कुमार सिंह का यह कदम अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि जिस नाम से कभी संघर्ष और हिंसा जुड़ी थी, उसी नाम पर अब अंतरराष्ट्रीय कुश्ती आयोजन किया जा रहा है।


मोकामा का यह महादंगल सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं बल्कि बिहार की बाहुबली राजनीति, पुराने गैंगवार और बदलते सामाजिक समीकरणों की कहानी भी साथ लेकर चल रहा है। विवेका पहलवान और अनंत सिंह की पुरानी दुश्मनी से लेकर वर्तमान में उसी पृष्ठभूमि पर हो रहे इस आयोजन ने पूरे इलाके को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

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Tejpratap

रिपोर्टर / लेखक

Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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