BIHAR NEWS : युवाओं में टैटू का बढ़ता क्रेज अब कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। खासकर “लव टैटू” यानी मोहब्बत की निशानी के तौर पर बनवाए गए टैटू, शादी तय होने के बाद मुश्किल खड़ी कर रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में युवा अब इन टैटू को हटवाने के लिए अस्पतालों और क्लीनिकों का रुख कर रहे हैं। जहां निजी क्लीनिक में टैटू हटवाना काफी महंगा पड़ता है, वहीं सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा मुफ्त या बेहद कम खर्च में उपलब्ध होने से लोगों को बड़ी राहत मिल रही है।
पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) में हाल ही में शुरू हुए अत्याधुनिक लेजर क्लीनिक में टैटू हटाने की सुविधा ने लोगों को खासा आकर्षित किया है। यहां न केवल टैटू हटाए जा रहे हैं, बल्कि अनचाहे बाल, चेहरे की चमक बढ़ाने और स्ट्रेच मार्क्स हटाने जैसी कई त्वचा संबंधी समस्याओं का इलाज भी किया जा रहा है।
एनएमसीएच के चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामअवतार सिंह के नेतृत्व में इस आधुनिक लेजर क्लीनिक की शुरुआत की गई है। वहीं त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास शंकर का कहना है कि अब आम लोग भी सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से आधुनिक त्वचा उपचार का लाभ उठा पा रहे हैं।
क्लीनिक में तीन प्रमुख लेजर तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है—क्यू-स्विच एनडी: वाईएजी लेजर, डायोड लेजर और फ्रैक्शनल CO2 लेजर। ये सभी तकनीकें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं और त्वचा संबंधी समस्याओं के इलाज में बेहद प्रभावी मानी जाती हैं। खास तौर पर क्यू-स्विच लेजर का उपयोग टैटू, झाइयां, मेलाज्मा और चेहरे के दाग-धब्बों को हटाने में किया जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार, यह लेजर तकनीक त्वचा की गहराई तक जाकर अनचाहे पिगमेंट को टारगेट करती है और धीरे-धीरे उसे खत्म करती है। इससे त्वचा साफ, उजली और स्वस्थ दिखाई देने लगती है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में लोग इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए एनएमसीएच पहुंच रहे हैं।
इस नई सुविधा के शुरू होने से लोगों को महंगे निजी क्लीनिकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। खासकर मध्यम और गरीब वर्ग के लिए यह बड़ी राहत है, क्योंकि अब उन्हें बेहतर इलाज सरकारी अस्पताल में ही सुलभ और किफायती दरों पर मिल रहा है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने टैटू बनवाने को लेकर सावधानी बरतने की भी सलाह दी है। डॉ. विकास शंकर के अनुसार, अगर टैटू बनवाते समय साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा गया तो गंभीर संक्रमण का खतरा हो सकता है। एक ही सूई का इस्तेमाल करने से हेपेटाइटिस और एचआईवी जैसे खतरनाक संक्रमण फैल सकते हैं। इसके अलावा बैक्टीरियल इंफेक्शन का जोखिम भी बना रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि टैटू बनवाने से पहले हमेशा प्रमाणित और स्वच्छ स्थान का चयन करना चाहिए। वहीं, अगर कोई टैटू हटवाना चाहता है तो विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही लेजर उपचार करवाना चाहिए।
कुल मिलाकर, टैटू का शौक युवाओं में भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन इसके साथ जुड़े जोखिम और बदलती परिस्थितियां अब लोगों को सतर्क भी कर रही हैं। ऐसे में एनएमसीएच जैसी सरकारी पहल न केवल राहत दे रही है, बल्कि लोगों को सुरक्षित और सुलभ इलाज का विकल्प भी प्रदान कर रही है।





