1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 13, 2026, 7:48:47 PM
प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google
Bihar NH Project: बिहार सरकार ने राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तीन नए ग्रीनफील्ड हाईवे कॉरिडोर—विश्वामित्र पथ, गंगा-अंबिका पथ और नारायणी पथ—के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बक्सर, पटना और उत्तर-पश्चिम बिहार के कई जिलों को बेहतर और तेज सड़क संपर्क मिलेगा। साथ ही उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन और व्यापार को नई गति मिलेगी।
बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDCL) द्वारा इन तीनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), भूमि अधिग्रहण के लिए नक्शा तैयार करने और आवश्यक सरकारी स्वीकृतियां प्राप्त करने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सरकार ने परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए प्रशासनिक तैयारियां भी पूरी कर ली हैं।
विश्वामित्र पथ
90 किलोमीटर लंबा विश्वामित्र पथ बक्सर, आरा और मनेर होते हुए गंगा पथ से जुड़ेगा। यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को सीधे पटना और दक्षिण बिहार से जोड़ने का काम करेगा। इसके निर्माण से बक्सर और पटना के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
गंगा-अंबिका पथ
56 किलोमीटर लंबा गंगा-अंबिका पथ दिघवारा से उसरी गंगा पथ तक विकसित किया जाएगा। यह मार्ग सारण क्षेत्र को गंगा नदी के किनारे बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करेगा और उत्तर तथा दक्षिण बिहार के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा।
नारायणी पथ
73.51 किलोमीटर लंबा नारायणी पथ दरिहारा से डुमरिया घाट तक बनाया जाएगा। गोपालगंज पथ के नाम से भी पहचाने जाने वाले इस कॉरिडोर से गंडक नदी क्षेत्र और उत्तर-पश्चिम बिहार के जिलों को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का दावा है कि एक्सप्रेसवे और फोरलेन मानकों पर बनने वाले ये तीनों हाईवे बिहार की आर्थिक तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। परियोजना के तहत सड़क किनारे लॉजिस्टिक्स पार्क, आधुनिक कृषि मंडियां और औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की भी योजना है, जिससे रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
तकनीकी प्रक्रिया अंतिम चरण में
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के अनुसार, परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। सर्वेक्षण, डिजाइनिंग और तकनीकी कार्यों के लिए देश की अग्रणी विशेषज्ञ कंपनियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। तकनीकी प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 24 जून 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद भूमि सर्वेक्षण और अंतिम डीपीआर तैयार करने का कार्य तेजी से शुरू किया जाएगा।