1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 17, 2026, 6:46:42 AM
Bihar svu - फ़ोटो Ai photo
Bihar News: बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने के लिए विशेष निगरानी इकाई (SVU) की शक्तियों में बड़ा बदलाव किया है। अब एसवीयू में तैनात इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी भी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर बिना वारंट गिरफ्तारी की कार्रवाई कर सकेंगे। इससे भ्रष्टाचार के मामलों में चल रही जांच प्रक्रिया को तेजी मिलने की उम्मीद है।
निगरानी विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, अब एसवीयू इंस्पेक्टरों को भ्रष्टाचार से जुड़े आपराधिक मामलों में अनुसंधान करने का अधिकार दिया गया है। पहले यह अधिकार केवल डीएसपी रैंक के अधिकारियों तक सीमित था। इसके साथ ही गिरफ्तारी की प्रक्रिया में भी इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को अधिक अधिकार दिए गए हैं।
बढ़ते मामलों को देखते हुए लिया गया फैसला
विशेष निगरानी इकाई में पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई बढ़ने के कारण मामलों की जांच का दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में जांच प्रक्रिया को तेज करने के लिए इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को भी जिम्मेदारी देने का फैसला किया गया।
एसवीयू के अपर पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार दाराद ने बताया कि पहले भ्रष्टाचार के मामलों में अनुसंधान और गिरफ्तारी की जिम्मेदारी मुख्य रूप से डीएसपी स्तर के अधिकारियों के पास थी। अब इंस्पेक्टरों को भी अधिकार मिलने से लंबित मामलों की जांच तेजी से पूरी हो सकेगी।
डीए और ट्रैप मामलों की जांच में आएगी तेजी
नई व्यवस्था के तहत आय से अधिक संपत्ति (डीए) से जुड़े मामलों की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी करेंगे, जबकि रिश्वतखोरी से जुड़े ट्रैप मामलों की जांच इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी कर सकेंगे।
एसवीयू अधिकारियों का मानना है कि इससे जांच अधिकारियों का काम बंटेगा और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की गति बढ़ेगी। खासकर उन मामलों में तेजी आएगी, जिनमें रिश्वत लेते हुए अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
इस साल अब तक दर्ज हुए 26 मामले
एसवीयू के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में आय से अधिक संपत्ति और रिश्वतखोरी से जुड़े कुल 35 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, वर्ष 2026 में जून तक ही 26 नए मामले दर्ज हो चुके हैं।
एसवीयू का लक्ष्य इस साल लगभग 50 मामलों की जांच पूरी करने का है। वर्तमान में विभाग में डीएसपी के 10 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 8 पदों पर अधिकारी तैनात हैं। वहीं इंस्पेक्टर के 10 पदों में केवल 3 अधिकारी कार्यरत हैं। विभाग जल्द ही खाली पदों को भरने की तैयारी कर रहा है।
आर्थिक अपराध थाना बना राज्यस्तरीय साइबर थाना
बिहार सरकार ने साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। गृह विभाग ने आर्थिक अपराध थाना को राज्यस्तरीय साइबर थाना का दर्जा दिया है।
राज्य में पहले से 44 साइबर थाने काम कर रहे हैं, लेकिन राज्य स्तर पर साइबर अपराध की निगरानी के लिए अलग व्यवस्था नहीं थी। अब आर्थिक अपराध थाना राज्यस्तरीय साइबर मामलों की जांच और कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सरकार के इन फैसलों से भ्रष्टाचार और साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई को मजबूती मिलने की उम्मीद है। एसवीयू को अतिरिक्त अधिकार मिलने से जहां जांच प्रक्रिया तेज होगी, वहीं राज्यस्तरीय साइबर थाना बनने से डिजिटल अपराधों पर नियंत्रण के प्रयासों को भी नई दिशा मिलेगी।