1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 17, 2026, 9:36:07 AM
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Bihar School News : बिहार की सरकारी स्कूल शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी ने स्पष्ट कहा है कि स्कूलों में केवल उपस्थिति दर्ज कराकर गायब रहने वाले शिक्षकों को अब किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी, जिसमें नौकरी समाप्त करने तक का प्रावधान शामिल है।
राज्य में लंबे समय से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि कुछ शिक्षक विद्यालय पहुंचकर हाजिरी बना लेते हैं, लेकिन कक्षाओं में पढ़ाई कराने के बजाय स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
इसी मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित नहीं रह सकते। उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी छात्रों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है।
शिक्षा मंत्री के अनुसार, यदि किसी शिक्षक के खिलाफ यह शिकायत मिलती है कि वह स्कूल में हाजिरी लगाकर बिना पढ़ाए चला जाता है या निर्धारित समय तक विद्यालय में उपस्थित नहीं रहता, तो उसकी जांच कराई जाएगी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू होगी। जरूरत पड़ने पर निलंबन और सेवा समाप्ति जैसे कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं।
सरकार ने स्कूलों की निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने का भी निर्णय लिया है। जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने तथा विद्यालयों में शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंचें और पूरे कार्यकाल के दौरान छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभाएं।
शिक्षा विभाग का मानना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए केवल आधारभूत सुविधाएं बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षकों की जवाबदेही तय करना भी उतना ही आवश्यक है। छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का भी कहना है कि विद्यालय में केवल उपस्थिति दर्ज करना शिक्षक के कर्तव्यों की पूर्ति नहीं है। नियमित कक्षा संचालन, छात्रों का मार्गदर्शन, पाठ्यक्रम पूरा कराना और शैक्षणिक वातावरण बनाना ही शिक्षक की वास्तविक जिम्मेदारी है। यदि शिक्षक अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाते हैं, तो सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार संभव है।
सरकार के इस सख्त रुख को बिहार के सरकारी स्कूलों में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि निगरानी और कार्रवाई की यह व्यवस्था जमीन पर कितना असर दिखाती है। फिलहाल सरकार का संदेश साफ है कि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा, और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।