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बिहार के 11 शहरों सैटेलाइट टाउनशिप: जमीन के बदले विकसित प्लॉट में किसानों की हिस्सेदारी, घर के साथ मिलेगा मुनाफा

Bihar Satellite Township: बिहार में 11 शहरों के आसपास सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएगी, जिसमें भू-स्वामियों को विकसित जमीन का 55% हिस्सा मिलेगा और कई जिलों में भूमि खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated May 01, 2026, 10:07:49 AM

Bihar satellite township

प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

Bihar Satellite Township: बिहार सरकार राज्य के 11 प्रमुख शहरों के आसपास आधुनिक सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भू-स्वामी अपनी जमीन देकर विकसित प्लॉट का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त करेंगे। इस योजना का उद्देश्य शहरों में बढ़ती भीड़ को कम करना, सुनियोजित शहरी विस्तार सुनिश्चित करना और नागरिकों को बेहतर जीवनशैली उपलब्ध कराना है।


इस परियोजना के लिए पर्याप्त भूमि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में 31 मार्च 2027 तक जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। वहीं भागलपुर, मुजफ्फरपुर, छपरा और सीतामढ़ी में यह प्रतिबंध 30 जून 2027 तक लागू रहेगा।


इस योजना में पारंपरिक भूमि अधिग्रहण की जगह भू-स्वामियों के साथ एग्रीमेंट मॉडल अपनाया जाएगा। जमीन विकसित कर प्लॉटिंग की जाएगी और करीब 55 प्रतिशत हिस्सा भूमि मालिकों को लौटाया जाएगा। इससे जमीन देने वाले लोग ही टाउनशिप के हिस्सेदार बनेंगे और उनकी संपत्ति का मूल्य कई गुना बढ़ सकता है।


प्रस्तावित टाउनशिप में आवासीय सुविधाओं के साथ स्कूल, क्लब, स्विमिंग पूल, जिम और हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। साथ ही स्वच्छ पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज और सुरक्षा की आधुनिक व्यवस्था भी की जाएगी। बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी इस योजना की प्रमुख विशेषता होगी।


अभी भूमि अधिग्रहण में सरकार बाजार मूल्य का चार गुना तक मुआवजा देती है, लेकिन इस मॉडल में जमीन की कीमत 10 गुना तक बढ़ने का अनुमान है। पुनपुन क्षेत्र में प्रस्तावित बड़े टाउनशिप के चलते जमीन के दाम 20 गुना तक बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।


नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार के अनुसार, इस परियोजना में किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा और किसी को भी भूमि से वंचित नहीं किया जाएगा। विकसित भूमि का उपयोग लोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कर सकेंगे या उसे बेच भी सकेंगे। यह योजना केवल नए शहर बसाने की पहल नहीं, बल्कि बिहार में संतुलित, आधुनिक और समावेशी शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।