1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 19, 2026, 10:10:50 AM
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पटना : बिहार पुलिस अब पूरी तरह डिजिटल होने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। आने वाले पांच से छह महीनों में राज्य की पुलिस अनुसंधान प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी जाएगी। यानी अब प्राथमिकी दर्ज करने से लेकर चार्जशीट दाखिल करने और फाइनल रिपोर्ट तैयार करने तक हर प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी। इससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी।
इस बड़े बदलाव की जानकारी अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के एडीजी पारसनाथ ने दी। उन्होंने बताया कि बिहार पुलिस आधुनिक तकनीक के जरिए जांच प्रणाली को मजबूत बनाने में जुटी है। डिजिटल एप और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम के इस्तेमाल से अनुसंधान प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
एडीजी पारसनाथ के मुताबिक, अब अभियुक्तों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इसमें फिंगरप्रिंट, फोटो, नाम, पता और आपराधिक इतिहास जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां ऑनलाइन सुरक्षित रखी जाएंगी। अपराधियों की पहचान को और सटीक बनाने के लिए राज्य के 28 जिलों में 50 माप संग्रह इकाइयों (एमसीयू) की स्थापना की गई है। इन इकाइयों के माध्यम से अपराधियों का डेटा डिजिटल रूप में संग्रहित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना को सफल बनाने के लिए सी-डैक की मदद ली जा रही है। इसी कड़ी में 12 से 15 मई के बीच गया, बेगूसराय, दरभंगा और मुजफ्फरपुर में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल अनुसंधान प्रणाली, डेटा अपडेटिंग और ऑनलाइन रिकॉर्ड प्रबंधन की जानकारी दी गई।
बिहार पुलिस अब ई-प्रिजन प्रणाली का भी उपयोग कर रही है। इसके जरिए अभियुक्तों के जेल आवागमन, आपराधिक इतिहास और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का ऑनलाइन सत्यापन किया जा रहा है। इससे पुलिस को जांच के दौरान पुराने मामलों की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी और अपराधियों की ट्रैकिंग आसान होगी।
राज्य में हर महीने औसतन 10 हजार अभियुक्तों के फिंगरप्रिंट ‘नफिस पोर्टल’ पर अपलोड किए जा रहे हैं। जनवरी से मार्च 2026 के बीच कुल 40 हजार 416 फिंगरप्रिंट अपलोड किए जा चुके हैं। यह केंद्रीयकृत पोर्टल देशभर की पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए काफी मददगार साबित हो रहा है। इसके माध्यम से अपराधियों के फिंगरप्रिंट का मिलान और पहचान बेहद तेजी से की जा सकती है।
सीआईडी एडीजी ने बताया कि राज्य के सभी थाना स्तर पर सीसीटीएनएस यानी क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। फिलहाल बिहार के 968 थाने इस नेटवर्क से जुड़ चुके हैं, जबकि बाकी बचे थानों को भी जल्द जोड़ा जाएगा।
सीसीटीएनएस पर दर्ज होने वाले मामलों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जनवरी 2026 में जहां 26 हजार 335 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज हुई थीं, वहीं अप्रैल में यह संख्या बढ़कर 26 हजार 981 तक पहुंच गई। इससे साफ है कि पुलिस विभाग डिजिटल व्यवस्था को तेजी से अपना रहा है।
बिहार पुलिस की यह नई पहल अपराध नियंत्रण और जांच प्रणाली को अधिक आधुनिक, तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इससे आम लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि मामलों की जांच और कार्रवाई पहले की तुलना में अधिक तेज गति से हो सकेगी।