1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 09, 2026, 8:28:56 AM
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Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही बिहार के ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है। गांव की चौपाल, चाय-नाश्ते की दुकानें, चौक-चौराहे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन दिनों चुनावी चर्चाओं से गुलजार हैं। संभावित उम्मीदवारों ने अभी से अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, जबकि आम मतदाता भी आरक्षण सूची और चुनावी कार्यक्रम को लेकर लगातार चर्चा कर रहे हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक पंचायत चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना और आरक्षण रोस्टर जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद संभावित आरक्षण को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। किस पंचायत में कौन-सा पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, इसे लेकर जनप्रतिनिधियों और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों की नजर आयोग के फैसले पर टिकी हुई है।
मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल इसी वर्ष दिसंबर में समाप्त होने वाला है। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव प्रक्रिया सितंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक संपन्न कराई जा सकती है। हालांकि चुनाव की तारीख और कार्यक्रम की अंतिम घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा ही की जाएगी। चुनाव की संभावनाओं के बीच गांवों में राजनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। संभावित उम्मीदवार घर-घर जाकर लोगों से संपर्क स्थापित कर रहे हैं। कई स्थानों पर छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन किया जा रहा है, जहां स्थानीय समस्याओं, विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हो रही है। समर्थकों के साथ चुनावी रणनीति तैयार करने का सिलसिला भी तेज हो गया है।
ग्रामीण राजनीति का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। पहले जहां चुनाव प्रचार केवल गांव की बैठकों और चौपालों तक सीमित रहता था, वहीं अब इंटरनेट मीडिया भी प्रचार का प्रमुख माध्यम बन चुका है। संभावित उम्मीदवार फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने में जुटे हैं। विकास कार्यों, जनसेवा और भविष्य की योजनाओं को लेकर लगातार प्रचार अभियान चलाया जा रहा है।
सबसे अधिक चर्चा आरक्षण रोस्टर को लेकर हो रही है। पिछले चुनाव में निर्वाचित कई मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य इस बार संभावित आरक्षण परिवर्तन को लेकर असमंजस में हैं। यदि उनके क्षेत्र का आरक्षण बदलता है तो कई जनप्रतिनिधियों को नया क्षेत्र तलाशना पड़ सकता है। वहीं कुछ लोग अपने परिवार के किसी सदस्य को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति भी बना रहे हैं।
वार्ड सदस्य, पंच, मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य पद के संभावित उम्मीदवार इन दिनों प्रखंड मुख्यालय का लगातार चक्कर लगा रहे हैं। सभी की कोशिश है कि आरक्षण संबंधी किसी भी संभावित जानकारी का पता चल सके। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक सूची के बाद ही स्पष्ट होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाता भी चुनाव को लेकर पूरी तरह सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। लोग अपने क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं और संभावित उम्मीदवारों के दावों का आकलन भी कर रहे हैं। इस बार विकास, सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे पंचायत चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल पंचायत चुनाव को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उम्मीदवारों और मतदाताओं दोनों की नजर राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना और आरक्षण रोस्टर पर टिकी हुई है। आयोग की घोषणा के बाद ही चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ होगी और नामांकन से लेकर प्रचार अभियान तक की गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।