1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 17, 2026, 1:38:09 PM
Bihar Panchayat Election 2026 - फ़ोटो FILE PHOTO
Bihar Panchayat Election 2026 : बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पंचायत चुनाव से पहले आरक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव की प्रशासनिक तैयारी शुरू हो चुकी है। इस बार पंचायत प्रतिनिधियों के कई पदों पर आरक्षण का पूरा गणित बदलने वाला है, जिससे गांव की राजनीति में नए चेहरे उभर सकते हैं और पुराने दावेदारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
दरअसल, पंचायती राज अधिनियम के तहत किसी भी पद को लगातार दो आम चुनाव तक एक ही श्रेणी के लिए आरक्षित रखने के बाद उसका आरक्षण चक्र बदलना अनिवार्य होता है। इसी नियम के तहत वर्ष 2026 के पंचायत चुनाव में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले दो चुनाव यानी 2016 और 2021 में जिन पदों पर एक ही कोटि के प्रत्याशियों को आरक्षण का लाभ मिला था, अब उन सीटों की श्रेणी बदलने की तैयारी है।
बिहार में पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। उस समय पहली बार मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और अन्य पंचायत प्रतिनिधियों के पदों पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया गया था। इसका पहला चक्र 2011 तक चला। इसके बाद 2016 और 2021 में दूसरी बार आरक्षण चक्र लागू हुआ। अब तीसरे चरण में प्रवेश करते हुए वर्ष 2026 में कई सीटों का आरक्षण बदलना तय माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, इस बार नई जनगणना और आबादी के आंकड़ों के आधार पर पंचायतों में आरक्षण तय किया जाएगा। ऐसे में जिन पंचायतों में अब तक किसी खास वर्ग के लिए सीट आरक्षित थी, वहां सामान्य या दूसरी श्रेणी के प्रत्याशियों को मौका मिल सकता है। इससे पंचायत चुनाव का पूरा समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।
आरक्षण व्यवस्था के तहत पंचायत चुनाव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को अधिकतम 50 प्रतिशत तक आरक्षण देने का प्रावधान है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को उनकी आबादी के अनुपात में सीटें आरक्षित की जाती हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी 25 प्रतिशत है तो उसी अनुपात में पद आरक्षित किए जाते हैं। इसके अलावा अत्यंत पिछड़ा वर्ग को करीब 20 प्रतिशत तक आरक्षण देने का प्रावधान लागू है।
ग्राम पंचायत सदस्य का आरक्षण पंचायत के कुल वार्डों के आधार पर तय होता है, जबकि मुखिया पद का आरक्षण पंचायत समिति क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाता है। इसी तरह पंचायत समिति सदस्यों का आरक्षण कुल सदस्यों की संख्या के आधार पर और प्रखंड प्रमुख पद का आरक्षण जिले के कुल पदों के 50 प्रतिशत अनुपात के अनुसार तय किया जाता है।
आरक्षण चक्र बदलने की संभावना के बाद संभावित उम्मीदवारों ने अभी से चुनावी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कई ऐसे नेता जो पिछले दो चुनावों से लगातार मैदान में थे, उनकी सीटें इस बार दूसरी श्रेणी में जा सकती हैं। वहीं, नए उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस बदलाव को लेकर चर्चा तेज है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव 2026 में आरक्षण का नया फार्मूला कई इलाकों में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। इससे पंचायत स्तर पर नेतृत्व में बदलाव और नए सामाजिक समीकरण उभरने की संभावना भी काफी बढ़ गई है।