1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 15, 2026, 11:14:05 AM
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Bihar News : पटना के लोक भवन में बुधवार को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक दिलचस्प और हल्का-फुल्का वाकया देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला दी। बिहार की राजनीति के इस बड़े दिन पर जहां सम्राट चौधरी ने राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, वहीं उनके साथ विजय चौधरी और विजेंद्र यादव ने मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। समारोह पूरे प्रोटोकॉल और गरिमा के साथ चल रहा था, लेकिन इसी बीच एक ऐसा क्षण आया जो चर्चा का विषय बन गया।
दरअसल, जब विजेंद्र यादव ने मंत्री पद की शपथ ली और उसके बाद अपनी निर्धारित सीट की ओर बढ़े, तो वह अचानक थोड़े असमंजस में नजर आए। वह मंच के आसपास नजर दौड़ाने लगे, मानो किसी को खोज रहे हों। उनकी नजरें बार-बार इधर-उधर घूम रही थीं, जिससे साफ लग रहा था कि वह किसी खास व्यक्ति को तलाश रहे हैं। पास ही मौजूद विजय चौधरी ने तुरंत उनकी स्थिति को समझ लिया।
विजय चौधरी ने मुस्कुराते हुए इशारे से विजेंद्र यादव को बताया कि नीतीश कुमार सामने नीचे की ओर बैठे हुए हैं। यह इशारा मिलते ही विजेंद्र यादव की नजर उस दिशा में गई, लेकिन इसी बीच नीचे बैठे नीतीश कुमार ने भी हल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “दिख नहीं रहे हैं क्या?” उनके इस टिप्पणी के साथ ही वहां मौजूद नेताओं और दर्शकों के बीच हल्की हंसी गूंज उठी।
इसके बाद विजेंद्र यादव ने तुरंत नीतीश कुमार को देखा और हाथ जोड़कर नमस्कार किया। यह दृश्य काफी सहज और आत्मीय था, जिसने समारोह के औपचारिक माहौल को कुछ पल के लिए हल्का बना दिया। नमस्कार करने के बाद विजेंद्र यादव अपनी सीट पर जाकर बैठ गए और कार्यक्रम आगे बढ़ता रहा।
इस छोटे से वाकये ने यह भी दिखाया कि राजनीतिक मंच पर भले ही औपचारिकता और गंभीरता का माहौल होता है, लेकिन नेताओं के बीच आपसी सहजता और आत्मीय संबंध भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। नीतीश कुमार का हल्का-फुल्का अंदाज और विजय चौधरी का तत्पर इशारा इस बात का संकेत था कि मंच के पीछे आपसी तालमेल और समझ कितनी मजबूत है।
शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल की मौजूदगी, वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी और बड़ी संख्या में आए समर्थकों के बीच यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आ गई। लोग इस वाकये को राजनीति के गंभीर माहौल में एक मानवीय और हल्के पल के रूप में देख रहे हैं।
बिहार की नई सरकार के गठन के इस अहम मौके पर जहां राजनीतिक समीकरण और भविष्य की रणनीतियों को लेकर चर्चाएं हो रही हैं, वहीं यह छोटा सा दृश्य यह भी याद दिलाता है कि राजनीति के मंच पर भी मानवीय भावनाएं और रिश्तों की गर्माहट बनी रहती है।