1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 20, 2026, 7:58:00 AM
प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google
Bihar NH projects: बिहार की छह बड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं फिलहाल अंतिम मंजूरी के अभाव में अटकी हुई हैं। केंद्र सरकार से इन योजनाओं को वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी अभी बाकी है।
51 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली ये परियोजनाएं फाइलों में ही अटकी हैं और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी सुस्त गति से चल रही है। इन परियोजनाओं में राज्य का पहला एक्सप्रेस-वे पटना से पूर्णिया के बीच प्रस्तावित मार्ग भी शामिल है।
हाल ही में आर्थिक कार्य विभाग के तहत पीपीपीएसी (लोक-निजी भागीदारी अनुशंसा समिति) ने इन सभी परियोजनाओं को एचएएम (हाइब्रिड एन्युटी मॉडल) पर बनाने की मंजूरी दी है। इस मॉडल में निर्माण एजेंसी 60% लागत वहन करती है, जबकि 40% खर्च सरकार करती है।
एजेंसी अपनी लागत की भरपाई टोल के जरिए करती है। हालांकि, जब तक केंद्रीय कैबिनेट से अंतिम स्वीकृति नहीं मिलती और थ्री-डी प्रक्रिया (जमीन अधिग्रहण) पूरी नहीं होती, तब तक परियोजनाओं पर जमीनी स्तर पर प्रगति संभव नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, इन परियोजनाओं को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिख रही है। विभागों के बीच पत्राचार और बैठकों में भी इनकी प्रगति पर विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा। माना जा रहा है कि कैबिनेट मंजूरी मिलने के बाद ही संबंधित विभाग तेजी से काम शुरू करेंगे।
पटना–पूर्णिया एक्सप्रेस-वे
राज्य का पहला एक्सप्रेस-वे पटना से पूर्णिया के बीच बनाया जाएगा। 244.96 किलोमीटर लंबे इस चार लेन एक्सप्रेस-वे पर करीब 31,987 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके बनने से दोनों शहरों के बीच यात्रा समय घटकर लगभग तीन घंटे रह जाएगा और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
अनीसाबाद–दीदारगंज एलिवेटेड रोड
पटना में अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच 13.41 किलोमीटर लंबा छह लेन एलिवेटेड रोड प्रस्तावित है, जिसकी लागत करीब 8,455 करोड़ रुपये है। इसके निर्माण से शहर में जाम की समस्या कम होगी और विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
वाराणसी–रांची–कोलकाता कॉरिडोर
वाराणसी, रांची और कोलकाता को जोड़ने वाली छह लेन सड़क परियोजना के एक पैकेज को मंजूरी मिली है। 41.95 किलोमीटर लंबे इस हिस्से पर लगभग 2,897 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें सोन नदी पर एक पुल का निर्माण भी शामिल है। इसके बनने से वाराणसी से कोलकाता की यात्रा लगभग सात घंटे में पूरी हो सकेगी और बंगरगाह तक माल परिवहन आसान होगा।