PMAY Phase 2: राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना-2 (PMAY-Urban Phase 2) के तहत बिहार के शहरी निकायों के लिए एक लाख अतिरिक्त शहरी आवासों की मांग केंद्र सरकार से की है। इस संबंध में नगर विकास एवं आवास विभाग ने केंद्र को औपचारिक पत्र भेजा है। यह मांग शहरी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे आवास आवेदनों को देखते हुए की गई है।
पीएम आवास योजना-2 के तहत राज्य को अगले पांच वर्षों में कुल पांच लाख आवास आवंटित किए गए हैं। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा सर्वेक्षण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पांच लाख से अधिक आवेदन आ चुके हैं और आवेदन प्रक्रिया फिलहाल भी जारी है। ऐसे में अतिरिक्त एक लाख आवासों की मांग को पूरी तरह तथ्यों और आवश्यकताओं पर आधारित बताया गया है।
इस संबंध में मुख्य सचिव स्तर पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें मौजूदा स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया कि बढ़ती मांग के मद्देनज़र केंद्र से एक लाख अतिरिक्त आवासों की स्वीकृति मांगी जाए। यदि यह प्रस्ताव केंद्र से स्वीकृत हो जाता है, तो राज्य में कुल छह लाख शहरी गरीबों को लाभ मिलेगा, जो अपने स्वयं के आवास के सपने को साकार कर सकेंगे।
वर्तमान में प्राप्त आवेदनों के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। सभी शहरी निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे सत्यापन कार्य को पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ पूरा करें। सत्यापन में किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की संभावना को रोकने के लिए दो विशेष टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें विभिन्न शहरी निकायों का दौरा करेंगी और आवेदकों से सीधे संवाद करके जानकारी जुटाएंगी, ताकि योजना का लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंचे।
नगर विकास एवं आवास मंत्री जिवेश कुमार ने विभागीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया है कि योजना के कार्यान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि योजना का लाभ पात्र लाभार्थियों को बिना किसी भेदभाव और भ्रष्टाचार के मिले।
बिहार सरकार का यह कदम राज्य के शहरी गरीबों के लिए न केवल सामाजिक सुरक्षा का प्रतीक है, बल्कि समावेशी विकास की दिशा में भी एक मजबूत पहल है। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत स्थायी, सुरक्षित और स्वच्छ आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, जिससे ‘सबका साथ, सबका विकास’ की परिकल्पना को ज़मीन पर उतारा जा सके।


