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Bihar politics : तो क्या नरेंद्र मोदी और शिवराज मिलकर तय करेंगे बिहार के नए CM का नाम? 14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे PM, शपथ ग्रहण में भी होंगे शामिल

बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 14 अप्रैल को कैबिनेट भंग और नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद NDA विधायक दल नया नेता चुनेगा। PM मोदी के पटना दौरे से CM चयन पर सस्पेंस और बढ़ गया है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 13, 2026, 10:04:19 AM

Bihar politics : तो क्या नरेंद्र मोदी और शिवराज मिलकर तय करेंगे बिहार के नए CM का नाम? 14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे PM, शपथ ग्रहण में भी होंगे शामिल

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Bihar politics : बिहार की सियासत इस समय अपने निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहां नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी तरह तय हो चुकी है। तारीख और समय से लेकर पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की रूपरेखा लगभग साफ हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और इस फैसले में किसकी कितनी भूमिका रहेगी।


सूत्रों के अनुसार 14 अप्रैल को सुबह 11 बजे मौजूदा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में वर्तमान मंत्रिपरिषद को भंग करने का औपचारिक निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद दोपहर में मुख्यमंत्री Nitish Kumar राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। इस इस्तीफे के साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।


इस्तीफे के बाद एनडीए विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसे इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम चरण माना जा रहा है। इसी बैठक में विधायक दल का नेता चुना जाएगा और उसी नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। यही नेता 15 अप्रैल को बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेगा।


इस पूरी प्रक्रिया के बीच सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि क्या मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला सीधे प्रधानमंत्री स्तर पर होगा। खबरें हैं कि भाजपा ने इस बार पूरी रणनीति बेहद सधे हुए तरीके से बनाई है और इसमें केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका काफी अहम रहने वाली है।


भाजपा ने बिहार में सरकार गठन की जिम्मेदारी अनुभवी नेता Shivraj Singh Chouhan को सौंपी है। उन्हें ऑब्जर्वर बनाकर भेजा गया है, जो विधायक दल की बैठक की निगरानी करेंगे और नेता चयन की प्रक्रिया को पूरा कराएंगे। ऐसे में यह माना जा रहा है कि उनकी रिपोर्ट और केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद ही अंतिम नाम तय होगा।


इसी बीच सबसे बड़ी खबर यह है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi खुद 14 अप्रैल को बिहार पहुंच सकते हैं। जानकारी के मुताबिक उनका यह दौरा दो दिवसीय होगा। वे 14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे और यहीं रात्रि विश्राम करेंगे। इसके बाद 15 अप्रैल को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल होंगे।


प्रधानमंत्री की मौजूदगी इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा अहम बना देती है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि उनकी मौजूदगी में होने वाला शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश का संकेत भी हो सकता है। इससे यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम सहमति में उनका सीधा प्रभाव हो सकता है।


पटना में प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। राजधानी की सड़कों पर बैरिकेडिंग की जा रही है, खासकर एयरपोर्ट से लेकर प्रमुख मार्गों तक सुरक्षा इंतजाम कड़े किए जा रहे हैं। कई जगहों पर बांस-बल्ले लगाकर रास्तों को नियंत्रित किया जा रहा है ताकि वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।


प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि सभी तैयारियां समय से पहले पूरी कर ली जाएं। कारीगरों और कर्मचारियों को तेजी से काम निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे शहर में एक तरह से हाई अलर्ट की स्थिति बनी हुई है।


अब बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मुख्यमंत्री पद की कमान किसे मिलेगी। क्या यह फैसला पूरी तरह विधायक दल की बैठक में होगा या फिर केंद्रीय नेतृत्व, खासकर प्रधानमंत्री और पार्टी के शीर्ष नेताओं की सहमति से नाम तय किया जाएगा—इस पर सभी की नजर बनी हुई है।


14 और 15 अप्रैल की तारीखें बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाली हैं। इन दो दिनों में न सिर्फ नई सरकार का गठन होगा, बल्कि यह भी तय होगा कि आने वाले समय में राज्य की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ेगी।