Ration scam Bihar : बिहार विधान परिषद में आज महेश्वर सिंह ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में वितरित होने वाले मुक्त अनाज के वजन और गुणवत्ता को लेकर कड़ी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य में तय 5 किलो राशन की जगह पूर्वी चंपारण जिले में केवल 4 किलो अनाज ही दिया जा रहा है। महेश्वर सिंह ने कहा कि यह स्पष्ट हेरा-फेरी है और इसके पीछे परिवहन ठेकेदार और अन्य लोग मिलकर गड़बड़ी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में FIR दर्ज की जा चुकी है और जिलाधिकारी व पटना में भी जांच करवाई गई, लेकिन इसके बावजूद हेरा-फेरी रोकने में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
महेश्वर सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब चारों तरफ से जांच हो चुकी है, फिर ऐसे लोगों को बचाने के लिए लीपापोती क्यों की जा रही है। उनका कहना था कि अनाज के इस घोटाले में शामिल लोगों पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए। इसी दौरान राजद के MLC तारीक अनवर ने बीच में टोका टोकी करना शुरू किया, जिस पर महेश्वर सिंह ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि वे दलाली का काम कर रहे हैं और अगर उनकी बात गलत साबित होती है तो वे इस्तीफा दे देंगे।
इस पर मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि महेश्वर सिंह हमारे सीनियर सदस्य हैं और गुस्से में हैं। उन्होंने सभी को आश्वस्त किया कि महेश्वर बाबू के साथ सरकार खड़ी है और वे इस मामले का समाधान निकालेंगे। मंत्री ने कहा कि सरकार का नियम है कि किसी भी शिकायत पर जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि जांच में अब तक आरोप के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं, इसलिए आरोपियों को आरोपमुक्त किया गया।
अशोक चौधरी ने महेश्वर सिंह से कहा कि यदि वे किसी विशेष जांच की मांग करते हैं, तो सरकार 15 दिनों के भीतर निर्दिष्ट पदाधिकारी से जांच कराकर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता और नियमों के तहत कार्रवाई करती है और महेश्वर भाई की चिंता को गंभीरता से लिया जाएगा।
इस पूरी घटना ने बिहार विधान परिषद में अनाज वितरण प्रणाली और भ्रष्टाचार के प्रति गंभीर सवाल उठाए हैं। महेश्वर सिंह का आक्रोश और स्पष्ट इस्तीफे की चुनौती ने सदन में हलचल मचा दी। सरकार ने मामले की जांच कराने और 15 दिन के भीतर निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन देते हुए विपक्ष को संतुष्ट करने का प्रयास किया। इस घटना से यह स्पष्ट हुआ कि राज्य में मुफ्त अनाज वितरण में गड़बड़ी की शिकायतें गंभीर हैं और पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है।
सरकार और विधान परिषद में हुए इस संवाद ने जनता के सामने यह संदेश भी दिया कि शिकायतों की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नियम और प्रमाण के आधार पर की जाती है, और किसी भी अनियमितता को लेकर सदन में खुलकर सवाल उठाए जा सकते हैं।






