1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 11, 2026, 1:20:15 PM
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Bihar Pension Loan : बिहार सरकार ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए एक नई डिजिटल वित्तीय सुविधा शुरू करने का फैसला किया है। अब कर्मचारियों और रिटायर्ड पेंशनभोगियों को आकस्मिक जरूरतों के लिए लोन लेने हेतु एजेंटों या निजी साहूकारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार की ओर से “ऑन-डिमांड वेतन/पेंशन अग्रिम योजना” लागू की गई है, जिसके तहत पात्र कर्मी अपने वेतन या पेंशन का अधिकतम 30 गुना तक ऋण प्राप्त कर सकेंगे।
इस योजना के तहत कर्मचारियों को अल्पकालिक वेतन अग्रिम और दीर्घकालिक ऋण की सुविधा बैंकों और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को 100 प्रतिशत डिजिटल और पेपरलेस बनाने का निर्णय लिया है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी, तेज और आसान हो सके। वित्त विभाग इस योजना का नोडल विभाग होगा और टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से योग्य बैंकों का चयन किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, अक्सर देखा गया है कि अचानक आर्थिक जरूरत पड़ने पर कई कर्मचारी निजी ऋणदाताओं या अनियमित फाइनेंस कंपनियों के जाल में फंस जाते हैं। इससे उन्हें भारी ब्याज और आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को खत्म करने के उद्देश्य से यह नई व्यवस्था तैयार की गई है। इसके लिए एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जो 24 घंटे और सातों दिन उपलब्ध रहेगा।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे राज्य सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार ने इसे “शून्य लागत एवं शून्य दायित्व मॉडल” पर लागू करने का फैसला किया है। ऋण से जुड़े जोखिम, जैसे कि बकाया राशि की वसूली नहीं होना, पूरी तरह संबंधित बैंक वहन करेंगे। बिहार सरकार केवल गारंटर की भूमिका निभाएगी, जिससे कर्मचारियों को आसानी से और कम समय में ऋण मिल सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को 60 दिनों तक के लिए वेतन अग्रिम मिलेगा। यदि कर्मचारी उसी या अगले वेतन चक्र में राशि लौटा देते हैं, तो उन पर किसी प्रकार का ब्याज या प्रोसेसिंग शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा 2 महीने से लेकर 60 महीने तक की अवधि के लिए दीर्घकालिक ऋण भी उपलब्ध रहेगा। मासिक ईएमआई कर्मचारी के शुद्ध वेतन या पेंशन के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, ताकि उनकी दैनिक जरूरतों और घरेलू खर्च पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
सरकार इस पूरी प्रणाली को राज्य के CFMS (कॉम्प्रिहेंसिव फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) और HRMS पोर्टल से जोड़ेगी। इससे लोन की स्वीकृति और ईएमआई कटौती की प्रक्रिया स्वतः संचालित होगी। कर्मचारियों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी हो सकेगी।
वित्त विभाग द्वारा जारी संकल्प में स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों और सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों के अनुरूप लागू की जाएगी। चयनित बैंक ग्राहकों को पहले ही सभी नियम, शर्तें और शुल्क की जानकारी देंगे, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे।
गौरतलब है कि राज्य मंत्रिपरिषद ने 6 मई 2026 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। यह सुविधा उन सभी सरकारी कर्मियों और पेंशनभोगियों को मिलेगी, जो सेवा में हैं या सेवानिवृत्त होकर पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह पहल कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ-साथ उन्हें शोषण से बचाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।