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अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई पहल: पटना में स्थापित होगा बिहार का पहला स्पेस क्लब, युवाओं को मिलेगा नया मंच

Bihar Space Club: पटना स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में बिहार का पहला ‘आर्यभट्ट स्पेस क्लब’ स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विज्ञान और स्पेस टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षण और शोध के अवसर प्रदान करना है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Jun 16, 2026, 8:21:11 AM

Bihar Space Club

प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो AI

Bihar Space Club: बिहार में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नई पहल की जा रही है। आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में राज्य का पहला स्पेस क्लब स्थापित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शरद कुमार यादव ने यह जानकारी दिल्ली में आयोजित इंडिया स्पेस कांग्रेस 2026 के दौरान दी।


‘आर्यभट्ट स्पेस क्लब’ का उद्देश्य

इस स्पेस क्लब का नाम ‘आर्यभट्ट स्पेस क्लब’ रखा गया है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विज्ञान, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, स्पेस डेटा एनालिटिक्स और उभरती अंतरिक्ष तकनीकों के प्रति रुचि विकसित करना है। इसके माध्यम से विशेषज्ञ व्याख्यान, वर्कशॉप और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि छात्रों को व्यावहारिक और शोध-आधारित ज्ञान मिल सके।


राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच से जुड़ाव

कुलपति प्रो. यादव ने बताया कि यह क्लब विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अंतरिक्ष गतिविधियों से जोड़ने में मदद करेगा। साथ ही यह नवाचार, शोध और कौशल विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा। इस पहल से बिहार और पूर्वी भारत के युवाओं को स्पेस साइंस और तकनीक के क्षेत्र में नए अवसरों की ओर प्रेरित किया जाएगा।


इंडिया स्पेस कांग्रेस 2026 में हुई घोषणा

इस स्पेस क्लब की घोषणा इंडिया स्पेस कांग्रेस 2026 के दौरान की गई। कुलपति ने कहा कि इस सम्मेलन में मिले अनुभव, विशेषज्ञों के विचार और उद्योग जगत से बने संपर्क विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


बिहार में खगोल विज्ञान का उत्कृष्ट केंद्र

विश्वविद्यालय का लक्ष्य बिहार और पूर्वी भारत में खगोल विज्ञान शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का एक प्रमुख केंद्र विकसित करना है। ‘आर्यभट्ट स्पेस क्लब’ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में विज्ञान शिक्षा को नई दिशा देगा।