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Bihar Driving Licence : अब सिर्फ टेस्ट पास करने से नहीं बनेगा लाइसेंस, बिहार सरकार ने लागू किया नया नियम

बिहार सरकार अगस्त 2026 से ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब मान्यता प्राप्त ड्राइविंग स्कूल से प्रशिक्षण और ट्रेनिंग सर्टिफिकेट के बिना लर्निंग लाइसेंस जारी नहीं होगा। इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना और दुर्घटनाएं कम

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 05, 2026, 9:21:00 AM

Bihar Driving Licence : अब सिर्फ टेस्ट पास करने से नहीं बनेगा लाइसेंस, बिहार सरकार ने लागू किया नया नियम

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Bihar Driving Licence : बिहार सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा बदलाव करने जा रही है। अगस्त 2026 से राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सख्त और प्रशिक्षण आधारित होगी। अब केवल आवेदन भरना और परीक्षा पास करना पर्याप्त नहीं होगा। प्रत्येक आवेदक को मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से प्रशिक्षण लेकर उसका प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य सड़क पर केवल प्रशिक्षित और जिम्मेदार चालकों को ही वाहन चलाने की अनुमति देना है।


पहले प्रशिक्षण, फिर मिलेगा लर्निंग लाइसेंस

परिवहन विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थियों को पहले अधिकृत ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से प्रशिक्षण लेना होगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मिलने वाले ट्रेनिंग सर्टिफिकेट को एम-परिवहन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। इस प्रमाणपत्र के बिना किसी भी आवेदक का लर्निंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।


अलग-अलग वाहनों के लिए तय होगी ट्रेनिंग अवधि

नई व्यवस्था में वाहन की श्रेणी के अनुसार प्रशिक्षण की अवधि भी निर्धारित की गई है।

* कार और मोटरसाइकिल (नॉन-कॉमर्शियल) के लिए कम से कम 21 दिन का प्रशिक्षण अनिवार्य होगा।

* हैवी और कॉमर्शियल वाहनों के लिए 30 दिन का प्रशिक्षण लेना होगा।

प्रशिक्षण के दौरान आवेदकों को ट्रैफिक नियम, सड़क संकेत, लेन अनुशासन, सुरक्षित ड्राइविंग तकनीक और विभिन्न परिस्थितियों में वाहन संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।


परीक्षा पास करने के बाद भी होगी दस्तावेजों की जांच

नई प्रणाली में ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा पास कर लेने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। आवेदकों को जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) में जाकर अपने सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा। इसी दौरान ट्रेनिंग सर्टिफिकेट की भी जांच की जाएगी। यदि प्रमाणपत्र सही पाया जाता है, तभी लर्निंग लाइसेंस जारी किया जाएगा। यदि जांच के दौरान फर्जी, गलत या संदिग्ध प्रमाणपत्र पाया जाता है तो संबंधित आवेदक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


सड़क हादसों को कम करना है सरकार का लक्ष्य

परिवहन विभाग का मानना है कि बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के वाहन चलाने वाले चालक सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनते हैं। इसी कारण अब ड्राइविंग लाइसेंस को केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि जिम्मेदार चालक बनने की योग्यता से जोड़ा जा रहा है। विभाग ने इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री सचिवालय भेज दिया है। मंजूरी मिलने के बाद सभी जिलों के जिला परिवहन पदाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे और नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।


राज्य में खुलेंगे 200 ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल

प्रशिक्षण आधारित व्यवस्था लागू होने के बाद ड्राइविंग स्कूलों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार राज्यभर में **200 ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल** खोलने की तैयारी कर रही है। इनमें से **66 स्कूलों को पहले ही मंजूरी** मिल चुकी है। इन संस्थानों में प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की देखरेख में सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियमों, डुअल कंट्रोल वाहन से अभ्यास, रात और बारिश में सुरक्षित ड्राइविंग तथा आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।


लगातार बढ़ रही है ड्राइविंग लाइसेंस की मांग

सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिहार में हर साल ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य में 4.32 लाख स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए, जबकि 5.84 लाख लोगों को लर्निंग लाइसेंस मिला। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में 21.38 लाख से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। इसी बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और प्रशिक्षण आधारित बनाना चाहती है, ताकि सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग संस्कृति विकसित हो सके।


सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो अगस्त 2026 से बिहार में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी। नई व्यवस्था का मूल सिद्धांत होगा—"पहले प्रशिक्षण, फिर लाइसेंस" सरकार का दावा है कि इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, ट्रैफिक नियमों के प्रति लोगों की समझ बढ़ेगी और राज्य में जिम्मेदार तथा प्रशिक्षित चालकों की नई पीढ़ी तैयार होगी।