Bihar Bhumi: बिहार सरकार ने दाखिल-खारिज और परिमार्जन प्लस के माध्यम से जमाबंदी में सुधार और जमीन से जुड़े विवादों को कम करने का दावा किया था। जिला और अंचल स्तर पर अधिकारियों को तय समय सीमा में आवेदनों के निपटारे के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में आवेदन लंबित पड़े हैं या कागजात की कमी बताकर रिजेक्ट किए जा रहे हैं।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, कुल आवेदनों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा खारिज कर दिया गया है। पटना जिले में दाखिल-खारिज से जुड़े कुल 6.37 लाख आवेदनों में से 3.66 लाख आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। राजस्व विभाग का तर्क है कि कई मामलों में आवश्यक दस्तावेज पूरे नहीं थे, जबकि आवेदकों का कहना है कि उन्हें बार-बार नई शर्तों और कागजातों के नाम पर दौड़ाया जा रहा है।
इस बीच, जिले में अब भी दाखिल-खारिज के 17,242 आवेदन लंबित हैं, जिससे स्पष्ट है कि प्रक्रिया पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है और आवेदकों को राहत मिलने में अभी समय लग सकता है। बुधवार को जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने सभी डीसीएलआर और अंचल अधिकारियों के साथ राजस्व मामलों की समीक्षा की। बैठक में सभी सीओ को निर्देश दिया गया कि दाखिल-खारिज और परिमार्जन प्लस से जुड़े आवेदनों का निपटारा निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाए।
अधिकांश रिजेक्ट किए गए आवेदनों में कागजातों की कमी को कारण बताया गया है। जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेज, वंशावली, रसीद और नक्शे जैसे कागजात जुटाना आम लोगों के लिए आसान नहीं है। इसी वजह से कई आवेदन तकनीकी आधार पर खारिज हो रहे हैं, जिससे आम नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
दाखिल-खारिज और परिमार्जन प्लस जैसी योजनाएं जमीन से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए अहम हैं। लेकिन जब बड़ी संख्या में आवेदन रिजेक्ट होते हैं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। आवश्यक है कि प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और आवेदकों को स्पष्ट मार्गदर्शन मिले, ताकि सरकारी पहल का उद्देश्य जमीन पर सही मायने में लागू हो सके।





