Bihar Assembly : पटना के सियासी गलियारों में उस वक्त अजीब सा नज़ारा देखने को मिला, जब बिहार विधानसभा के पोर्टिको में विपक्ष खासकर कांग्रेस विधायक जोरदार प्रदर्शन करने पहुंचे थे। हाथों में तख्तियां, चेहरे पर गुस्सा और जुबान पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ नारे… सब कुछ पूरी तैयारी के साथ था। लेकिन जैसे ही नीतीश कुमार वहां पहुंचे, सियासी गर्मी अचानक ठंडी पड़ गई और विरोध का पूरा जोश “टाय-टाय फिश” हो गया।
दरअसल, बिहार में लगातार सामने आ रहे छात्राओं और बच्चियों से जुड़े मामलों को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि नीतीश कुमार के शासन में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उनका कहना था कि बिहार में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायक तख्तियां लहराते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायकों ने पप्पू यादव की गिरफ्तारी का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। पोर्टिको में मौजूद कांग्रेस विधायक पूरी तरह आक्रामक मुद्रा में नजर आ रहे थे और मीडिया कैमरों के सामने सरकार पर हमला बोलने के लिए तैयार खड़े थे।
लेकिन तभी माहौल ने ऐसा करवट लिया, जिसकी शायद किसी को उम्मीद नहीं थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे ही विधानसभा परिसर में पहुंचे, कांग्रेस विधायकों के सुर अचानक धीमे पड़ गए। जो तख्तियां कुछ सेकंड पहले तक हवा में लहरा रही थीं, वे धीरे-धीरे नीचे झुक गईं। नारेबाजी की आवाज भी मानो किसी ने वॉल्यूम कम कर दिया हो। विरोध का तेवर अचानक शांत पड़ गया।
उधर, नीतीश कुमार पूरे आत्मविश्वास के साथ मुस्कुराते हुए विधानसभा परिसर में दाखिल हुए। उन्होंने हाथ हिलाकर सबका अभिवादन किया और बिना किसी प्रतिक्रिया के सीधे अंदर चले गए। इस दौरान कांग्रेस विधायक एक-दूसरे का चेहरा देखते रह गए और विरोध का जोश ठंडे बस्ते में चला गया।
हालांकि मुख्यमंत्री के अंदर जाते ही कांग्रेस विधायक फिर से सक्रिय हो गए। उन्होंने मीडिया के सामने आकर सरकार पर जमकर निशाना साधा और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर नीतीश सरकार को घेरा। विधायकों ने कहा कि बिहार में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने विधानसभा परिसर में सियासी माहौल को गर्म जरूर कर दिया, लेकिन साथ ही विपक्ष की रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई कि अगर विरोध इतना ही मजबूत था, तो मुख्यमंत्री के सामने वह अचानक क्यों शांत हो गया?
अब इस घटनाक्रम को लेकर सत्ता पक्ष विपक्ष पर तंज कसने का मौका नहीं छोड़ रहा है। वहीं विपक्ष का कहना है कि उनका संघर्ष जारी रहेगा और वे जनता के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरते रहेंगे। लेकिन विधानसभा परिसर में दिखा यह नजारा फिलहाल बिहार की सियासत में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है




