1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 22, 2026, 10:09:39 PM
जांच में जुटी पुलिस - फ़ोटो सोशल मीडिया
MUZAFFARPUR: बिहार में अपराधियों का हौसला इतना बुलंद हैं कि अब वे सांसद के नाम पर अधिकारियों को धमकाने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मुजफ्फरपुर पश्चिमी की डीसीएलआर (भूमि सुधार उप समाहर्ता) स्नेहा कुमारी से जुड़ा है, जिन्हें नवादा के भाजपा सांसद विवेक ठाकुर के नाम से फर्जी कॉल कर न केवल धमकाया गया, बल्कि सरकारी कार्य में बाधा डालने का प्रयास भी किया गया। इस संबंध में अधिकारी ने जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन से शिकायत की है और संबंधित नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, डीसीएलआर पश्चिमी स्नेहा कुमारी ने अपनी शिकायत में बताया कि घटना 11 अप्रैल की है। उस दिन दोपहर लगभग 3:31 बजे उनके सरकारी मोबाइल नंबर (8709230010) पर दो बार और उनके व्यक्तिगत मोबाइल नंबर पर भी दो बार अज्ञात नंबर से कॉल आए। जब उन्होंने कॉल रिसीव किया, तो दूसरी ओर से बात कर रहे व्यक्ति ने अपना परिचय नवादा के सांसद विवेक ठाकुर के रूप में दिया। जालसाज ने अपनी पहचान पुख्ता करने के लिए अपने पिता का नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. ठाकुर भी बताया।
राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई रोकने का दबाव
फर्जी सांसद बने व्यक्ति ने डीसीएलआर से कहा कि मड़वन अंचल के राजस्व कर्मचारी सन्नी कुमार के विरुद्ध विभाग द्वारा कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी के निर्देशानुसार की जानी थी। कॉल करने वाले ने स्नेहा कुमारी पर दबाव बनाया कि वे सन्नी कुमार के खिलाफ इस कार्रवाई को रोक दें। जब अधिकारी ने स्पष्ट रुख अपनाया, तो जालसाज धमकी पर उतर आया। उसने डीसीएलआर को डराते हुए कहा कि यदि वे उसकी बात नहीं मानती हैं, तो उनके विरुद्ध निगरानी विभाग (Vigilance Department) में पत्र भेजकर शिकायत दर्ज कराई जाएगी और उन्हें मुश्किल में डाल दिया जाएगा।
सांसद से बातचीत के बाद खुला राज
इस धमकी भरे कॉल के बाद अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सूचना जिलाधिकारी को दी। 17 अप्रैल को डीसीएलआर स्नेहा कुमारी ने खुद नवादा के सांसद विवेक ठाकुर से संपर्क किया और उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। सांसद विवेक ठाकुर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई कॉल नहीं किया है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति उनके नाम और पद का दुरुपयोग कर अधिकारियों को गुमराह और भयभीत कर रहा है।
पुलिस जांच में जुटी
सांसद से बातचीत के बाद यह साफ हो गया कि 11 अप्रैल को आया कॉल पूरी तरह से फर्जी (फ्रॉड) था। इसके बाद डीसीएलआर ने जिलाधिकारी के निर्देश पर थाने में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर और कॉल करने वाले व्यक्ति की तलाश में जुट गई है। साइबर सेल की मदद से कॉल लोकेशन और सिम कार्ड के विवरण खंगाले जा रहे हैं ताकि इस गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके। प्रशासनिक हलकों में इस घटना के बाद हड़कंप मचा हुआ है।