1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 05, 2026, 9:02:46 PM
परिजनों में मचा कोहराम - फ़ोटो सोशल मीडिया
MADHEPURA: स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के बड़े-बड़े दावों के बीच मधेपुरा सदर अस्पताल से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। अस्पताल प्रशासन की कथित लापरवाही और डॉक्टरों की अनुपलब्धता ने एक गरीब परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। यहाँ प्रसव के बाद एक नवजात शिशु की उचित देखरेख और समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मौत हो गई।
क्या है पूरा मामला?
प्रोफेसर कॉलोनी निवासी एमडी सिराज ने बताया कि वह अपनी पत्नी को प्रसव के लिए अस्पताल लाए थे। प्रसव सफलतापूर्वक हुआ और बच्चा स्वस्थ था। हालांकि, ड्यूटी पर तैनात नर्सों ने बताया कि बच्चे की स्थिति थोड़ी नाजुक है और उसे विशेष वार्ड में ले जाने की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि जब वे बच्चे को लेकर संबंधित वार्ड में पहुंचे, तो वहां अव्यवस्था का बोलबाला था।
"आधा घंटा तक टाला गया इलाज"
सिराज के अनुसार, वह करीब आधे घंटे तक बच्चे को लेकर अस्पताल में भटकते रहे और मिन्नतें करते रहे, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। उन्होंने बताया, "हमें 20-30 मिनट तक यह कहकर रोका गया कि डॉक्टर आ रहे हैं। बाद में बताया गया कि डॉक्टर उपलब्ध ही नहीं हैं। जब बच्चे को बेड पर लिटाया गया और एक सुई लगाई गई, तो उसके शरीर से खून आने लगा। इसके कुछ ही मिनट बाद डॉक्टरों ने टॉर्च जलाकर बच्चे को देखा और उसे मृत घोषित कर दिया।"
गरीब की बेबसी: "पहले बता देते तो कहीं और ले जाते"
आंखों में आंसू और गुस्से के साथ सिराज ने कहा कि अगर अस्पताल प्रशासन ने समय रहते अपनी असमर्थता जता दी होती, तो वे अपने बच्चे को किसी निजी अस्पताल में ले जाकर उसकी जान बचा सकते थे। उन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गरीबी का मतलब यह नहीं कि किसी की जान के साथ खिलवाड़ किया जाए।
इंसाफ की गुहार
इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से न्याय की मांग की है। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सदर अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी और स्टाफ की संवेदनहीनता आम बात हो गई है। अब देखना यह होगा कि क्या इस गंभीर लापरवाही पर अस्पताल प्रशासन कोई कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।