1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jul 02, 2026, 11:01:08 AM
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Bihar News : बिहार के गोपालगंज जिले से फूड प्वाइजनिंग का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के कृतपुरा गांव में दूध से बने पारंपरिक व्यंजन फेंसा का सेवन करने के बाद एक ही परिवार के 12 लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इनमें 10 बच्चे और 2 महिलाएं शामिल हैं। सभी को उल्टी और दस्त की शिकायत होने पर पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए गोपालगंज सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल सभी मरीजों की हालत पहले से बेहतर बताई जा रही है।
परिजनों के अनुसार, गांव निवासी अनिल सहनी के घर एक मवेशी ने हाल ही में बछड़े को जन्म दिया था। ग्रामीण परंपरा के अनुसार ताजे दूध से फेंसा तैयार किया गया। इसके बाद यह व्यंजन परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों के घर भी भेजा गया। बुधवार रात सभी ने मिलकर फेंसा खाया, लेकिन कुछ ही समय बाद कई लोगों को पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हो गई। देखते ही देखते घर में अफरा-तफरी मच गई। बच्चों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजन बिना देर किए सभी को इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे।
बीमार लोगों को सबसे पहले बैकुंठपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन कई मरीजों की स्थिति को देखते हुए उन्हें गोपालगंज सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल में भर्ती बच्चों में प्रिया कुमारी, सिमरन कुमारी, प्रियांशु, ऋषभ, अभिराज, मोनालिसा, ऋतिक और अतुल समेत अन्य बच्चे शामिल हैं। दो महिलाओं का भी इलाज चल रहा है। डॉक्टरों की निगरानी में सभी मरीजों का उपचार जारी है।
गोपालगंज सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि सभी मरीज समय पर अस्पताल पहुंच गए, जिसके कारण स्थिति को नियंत्रित किया जा सका। उन्होंने कहा कि फिलहाल सभी की हालत स्थिर है और लगातार सुधार हो रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, शुरुआती जांच में मामला फूड प्वाइजनिंग का प्रतीत हो रहा है। हालांकि, आवश्यकता पड़ने पर खाद्य पदार्थ की जांच भी कराई जा सकती है ताकि बीमारी की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी और बरसात के मौसम में दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो सकते हैं। यदि इन्हें लंबे समय तक खुले में रखा जाए या स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए तो इनमें बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं, जिससे फूड प्वाइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. पंकज कुमार ने लोगों से अपील की कि दूध से बने व्यंजन हमेशा ताजा बनाकर ही खाएं। यदि किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो तो उसका सेवन करने से बचें। साथ ही भोजन बनाने और परोसने के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
घटना के बाद गांव में भी लोगों के बीच चिंता का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को भोजन करने के बाद लगातार उल्टी, दस्त, पेट दर्द या कमजोरी महसूस हो तो घरेलू इलाज में समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि पारंपरिक व्यंजन चाहे कितने भी स्वादिष्ट क्यों न हों, उनकी तैयारी और भंडारण में स्वच्छता और सावधानी बेहद जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही भी पूरे परिवार के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है।