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कोल्ड स्टोरेज हादसे में बिहार के तीन मजदूरों की मौत, कई घायल, गांव में पसरा मातम

Bihar News: रोजी-रोटी की तलाश में घर से दूर गए इन मजदूरों को क्या पता था कि एक दिन काम की जगह ही उनकी जिंदगी छीन लेगी… प्रयागराज में अचानक गिरी एक इमारत ने सब कुछ पलभर में खत्म कर दिया। लेकिन जब शव गांव पहुंचे, तो जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी की

कोल्ड स्टोरेज हादसे में बिहार के तीन मजदूरों की मौत, कई घायल, गांव में पसरा मातम
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Bihar News: बिहार के सहरसा जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्य गए मजदूरों पर कहर टूट पड़ा। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक कोल्ड स्टोरेज की इमारत गिरने से सहरसा के तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है।

मृतकों में सलखुआ प्रखंड के बलियार मुसहरी वार्ड संख्या 7 निवासी 28 वर्षीय ज्योतिष सादा भी शामिल हैं। ज्योतिष अपने परिवार के सबसे बड़े बेटे थे और उनके ऊपर पूरे घर की जिम्मेदारी थी। उनके परिवार में पत्नी रीता देवी, ढाई साल की बेटी सोना परी और महज एक महीने का दूधमुंहा बेटा दीवाना सादा है। उनकी मौत के बाद जब शव गांव पहुंचा, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया।


सबसे मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला जब पत्नी रीता देवी ने ही अपने पति को मुखाग्नि दी। घर में कोई बड़ा पुरुष सदस्य नहीं होने के कारण उन्होंने यह जिम्मेदारी निभाई। पति की मौत के गम में वह इस कदर टूट चुकी हैं कि लगातार रोने से उनकी आवाज तक बैठ गई है।


परिजनों के अनुसार, ज्योतिष सादा ने गरीबी और मजबूरी के कारण गांव के ठेकेदार से कर्ज लिया था। उस समय उनकी पत्नी गर्भवती थीं और डिलीवरी के लिए पैसों की जरूरत थी। उन्होंने मजदूरी कर कर्ज चुकाने का वादा किया और इसी उम्मीद में प्रयागराज कमाने चले गए थे, जहां उन्हें 10 से 12 हजार रुपये महीने मिलने की बात कही गई थी।


हादसे के दिन भी ज्योतिष ने अपनी पत्नी से बात की थी। उन्होंने बताया था कि बच्चे की तबीयत खराब है तो उसे नजदीकी क्लीनिक में दिखा दें। पत्नी बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास गई भी, लेकिन करीब एक घंटे बाद जब उसने दोबारा फोन किया तो मोबाइल बंद मिला। कुछ ही देर में यह दुखद खबर मिली कि उनके पति की मौत हो चुकी है।


इस हादसे में 20 वर्षीय मशीन्द्र सादा की भी मौत हो गई। वह छह भाइयों में तीसरे स्थान पर थे और घर के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मां फूलों देवी ने बताया कि अभी उनके पति की मौत को एक साल भी नहीं हुआ था और अब बेटे के जाने से पूरा परिवार बिखर गया है। वह कहती हैं कि अब परिवार चलाने के लिए उन्हें दूसरों के घरों में काम करना पड़ेगा।


फूलों देवी ने यह भी बताया कि उनका गांव कभी कोसी नदी के कटाव में बह गया था, जिसके बाद वे लोग तटबंध के किनारे आकर बस गए। सरकारी जमीन पर रहने के कारण उन्हें न तो किसी योजना का लाभ मिल पाया और न ही बिजली जैसी बुनियादी सुविधा मिल सकी। अब बेटे की मौत के बाद उनके सामने जीवन यापन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।


इसी हादसे में तीसरे मृतक 35 वर्षीय सनोज चौधरी थे, जो पिपरा गांव के रहने वाले थे। उनके 12 वर्षीय बेटे शिवम कुमार ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। सनोज के तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं और पूरे परिवार का खर्च उन्हीं की कमाई से चलता था। अब उनके जाने के बाद परिवार पूरी तरह असहाय हो गया है।


इस हादसे ने सहरसा के कई परिवारों को उजाड़ दिया है। एक ही घटना में कई घरों के चूल्हे बुझ गए हैं। गांव में हर तरफ मातम पसरा हुआ है और लोग इस दर्दनाक घटना को लेकर स्तब्ध हैं।

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रिपोर्टर / लेखक

Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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