Bihar road construction rules 2026 : बिहार सरकार सड़क निर्माण में संवेदकों के कामकाज और जिम्मेदारियों को और पारदर्शी बनाने के लिए नई नियमावली लेकर आ रही है। वर्तमान में संवेदक बिहार ठेकेदारी निबंधन नियमावली 2007 के तहत पंजीकरण कराते हैं, लेकिन अब इसे बदलकर “बिहार संवेदक निबंधन नियमावली 2026” लागू किया जाएगा। नई नियमावली के माध्यम से संवेदकों की जिम्मेदारी, लापरवाही पर आर्थिक दंड और परियोजनाओं में भागीदारी की स्पष्ट रूपरेखा तय की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, नई नियमावली में संवेदकों के लिए एक नई श्रेणी “श्रेणी-1” बनाई जा रही है। इस श्रेणी के तहत पंजीकरण कराने वाले संवेदक केवल उन परियोजनाओं की निविदा में भाग ले सकेंगे, जिनकी लागत 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक है। वर्तमान 2007 की नियमावली में ऐसी कोई विशेष श्रेणी नहीं है, जिससे बड़े बजट की परियोजनाओं में अनुभव और क्षमता के हिसाब से संवेदकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
नियमावली 2026 में संवेदकों की लापरवाही के लिए स्पष्ट आर्थिक दंड और काली सूची का प्रावधान किया गया है। इसके तहत यह स्पष्ट किया जाएगा कि किसी संवेदक की कंपनी द्वारा निर्धारित गुणवत्ता, समयसीमा या अन्य तकनीकी मानकों का उल्लंघन करने पर कितनी राशि का दंड लगेगा। साथ ही यह भी तय होगा कि किसी आरोप या उल्लंघन के मामले में कंपनी को कितने समय तक काली सूची में रखा जा सकता है। यह प्रावधान पहले की नियमावली में मौजूद नहीं था और इसे लागू करने का उद्देश्य सड़क निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ाना बताया गया है।
बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग ने यह भी जानकारी दी है कि नई नियमावली के आने के साथ ही मॉडल बिडिंग दस्तावेज में “हाईब्रिड एन्यूटि मॉडल” को भी शामिल किया जाएगा। इस मॉडल के तहत परियोजना विशेष की आवश्यकताओं के हिसाब से निविदा में विशेष शर्तें जोड़ी जाएंगी। उदाहरण के तौर पर, परियोजना के लिए कंपनी अपनी ओर से 70 प्रतिशत निवेश करेगी और शेष राशि सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी। इस प्रकार का मॉडल संवेदक और सरकार के बीच साझेदारी को मजबूत करेगा और परियोजनाओं की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा।
बिहार कैबिनेट ने अक्टूबर 2025 में हाईब्रिड एन्यूटि मॉडल को लागू करने की अनुमति दी थी। पथ निर्माण विभाग इस मॉडल के तहत कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं में काम शुरू करने की योजना बना रहा है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस मॉडल से परियोजनाओं की समय पर पूरी होने की संभावना बढ़ेगी और खर्च में पारदर्शिता आएगी।
सूत्रों का कहना है कि नियमावली 2026 नए वित्तीय वर्ष में लागू हो सकती है। नियमावली के संलेख का मसौदा तैयार होने की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है। इसके साथ ही विभाग यह भी सुनिश्चित करेगा कि संवेदकों को नई श्रेणी और दंड प्रणाली के बारे में व्यापक जानकारी दी जाए, ताकि वे समय पर अपने पंजीकरण और परियोजना निविदा में भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।
यह नई नियमावली सड़क निर्माण क्षेत्र में जवाबदेही और गुणवत्ता दोनों बढ़ाने में मदद करेगी। संवेदकों को अब तकनीकी दक्षता, समय पालन और वित्तीय अनुशासन के लिहाज से और अधिक सतर्क रहना होगा। यह नियमावली बड़े प्रोजेक्टों के लिए अनुभवी संवेदकों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ लापरवाह या अनुचित कार्यवाही करने वाली कंपनियों पर कड़ा दंड भी सुनिश्चित करेगी।
इस प्रकार, बिहार में सड़क निर्माण में नई नियमावली 2026 के लागू होने से परियोजनाओं की गुणवत्ता, समय पर कार्यान्वयन और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह कदम राज्य सरकार की ओर से सड़क निर्माण के क्षेत्र में उत्तरदायित्व और जवाबदेही को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


