Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में मछली पालन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक आधुनिक होलसेल मछली मार्केट की स्थापना की जाएगी। पशुपालन एवं मत्स्य विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत एम्स अस्पताल के पास फुलवारीशरीफ में डेढ़ एकड़ जमीन पर इस मार्केट के निर्माण की योजना बनाई है। केंद्र सरकार से इसके लिए फंडिंग भी प्राप्त हो चुकी है। इस मार्केट में मछलियों को संरक्षित करने के लिए कोल्ड चेम्बर बनाया जाएगा, जिससे बिहार से अन्य राज्यों में मछली निर्यात और बाहर से मछली मंगवाना आसान होगा। यह परियोजना मछली व्यापारियों और मछुआरों की आय बढ़ाने में मददगार होगी।
इस होलसेल मार्केट में मछली मार्केटिंग से जुड़े अधिकारियों की तैनाती होगी जो व्यापारियों की समस्याओं का त्वरित समाधान करेंगे। जल्द ही इसके निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके बाद काम शुरू हो जाएगा। इसके अलावा पटना के विद्यापति मार्ग पर एक पांच मंजिला मत्स्य मॉल भी बनाया जाएगा। इस मॉल में रंगीन मछलियों का एक्वेरियम, फिश स्पा, मछली से बने उत्पादों की दुकानें और मछलियों से जुड़ी जानकारी बच्चों के लिए उपलब्ध होगी। मॉल का निर्माण पटना म्यूजियम के पास होगा, जिसके लिए भवन निर्माण विभाग से अनुमति की प्रक्रिया चल रही है क्योंकि इस क्षेत्र में ऊंची इमारतों के लिए विशेष मंजूरी जरूरी है।
जबकि पटना में मछली पालन को और मजबूत करने के लिए मीठापुर में एक मत्स्य विकास भवन भी बनाया जाएगा। इस पांच मंजिला भवन में चार छोटे तालाब होंगे, जहां मत्स्य वैज्ञानिक अनुसंधान करेंगे। साथ ही मछली पालकों, फिश फीड मिल संचालकों, मत्स्य पालन के छात्रों और अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। खास बात यह है कि भवन में महिलाओं के लिए अलग से हॉस्टल की सुविधा होगी जो महिला मछुआरों और छात्राओं को प्रोत्साहन देगी।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बिहार में मछली उत्पादन और रोजगार सृजन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। PMMSY के तहत बिहार के लिए 1390 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न परियोजनाएं चल रही हैं, जिसमें से 535 करोड़ रुपये केंद्र सरकार का योगदान है। पटना पिछले चार वर्षों से इस योजना में पूरे बिहार में पहले स्थान पर रहा है और 240 स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है। ये परियोजनाएं न केवल मछुआरों की आय बढ़ाएंगी बल्कि बिहार को मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करेंगी। स्थानीय लोगों और मछुआरों ने इस पहल का स्वागत किया है और इसे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया है।






