Bihar Health System: बिहार के कटिहार सदर अस्पताल में मरीजों के बेहतरीन इलाज के दावे को खूब किए जाते हैं लेकिन इसके पीछे की सच्चाई कुछ और ही है। कोरोना काल में जीवन रक्षक बने करोड़ की लागत से स्थापित ऑक्सीजन प्लांट की हालत इतनी जर्जर हो गई कि आखिरकार ऑक्सीजन प्लांट को बंद ही कर दिया है।
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद, यह जीवनदायिनी सुविधा महीनों से बंद पड़ी है। अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने भारी-भरकम राशि खर्च की जा रही है लेकिन ऑक्सीजन प्लांट महीनों से तकनीकी खराबी के कारण ठप पड़ा है।
ऑक्सीजन प्लांट की खराबी के कारण आईसीयू और एसएनसीयू जैसे महत्वपूर्ण इकाइयों में सीधे ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। वहीं गंभीर मरीज़ों को जिन्हें निरंतर और उच्च दबाव वाली ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है उन्हें सिलेंडरों पर अपने सांसों को जिंदा रखना पड़ता है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि तीन बार ख़राब होने के बाद उसे ठीक कराने के लिए ढाई ढाई लाख रुपया तथा समान में पौने दो लाख रुपया लगाया गया है। कटिहार सदर अस्पताल के उपाधीक्षक आशा शरण ने कहा कि मशीनरी समान है, खराब हो जाता है। हमने प्रक्रिया कर दिया है कुछ पार्ट्स नहीं मिल रहे हैं। बाहर से लाना है, पार्ट्स आने के बाद प्लांट को चालू किया जाएगा।



