Bihar Assembly : बिहार विधान परिषद में आज की कार्यवाही में विवाद और नोंकझोंक का माहौल देखने को मिला। सदन की कार्यवाही तय समय से 15 मिनट देर से शुरू हुई। इस पर राजद के विधान पार्षद सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच जमकर भिडंत हो गई और बात गाली -गलौज तक पहुंच गई। उसके बाद सभापति ने विपक्ष के सदस्यों को मार्शल आउट करने का आदेश दिया।
अशोक चौधरी ने कहा कि- राजद के कुछ लोग हैं जो लगातार किसी न किसी को टारगेट कर कुछ न कुछ बोलते रहते हैं। कल भी वे किस तरह की हरकत कर रहे थे, यह देखने योग्य था। नेता प्रतिपक्ष खुद बिल तो छोड़िए, ट्रेजरी बेंच के पास आकर हंगामा कर रहे थे। इसके बाद उनके एक सदस्य ने सभी मर्यादाओं को ही तार-तार कर दिया।
यह सदस्य खुद को सबसे अधिक विद्वान समझते हैं और पढ़े-लिखे होने का दिखावा करते हैं। यह स्वयं चलते-फिरते विकिपीडिया मानते हैं। उन्होंने आज जिस तरह से सदन में भाषा का प्रयोग किया, मर्यादित शब्दों का पालन नहीं किया और गाली-गलौज तक की, उसका वीडियो रिकॉर्डिंग में सबूत है। सभापति महोदय ने इसका संज्ञान लिया है और मुझे उम्मीद है कि निकट भविष्य में इस पर कुछ कार्रवाई जरूर होगी।
सदन में इस तरह का आचरण और भाषण मर्यादाओं का उल्लंघन है। सदन में राज्यों की जनता के सवाल पूछे जाते हैं। सदन की अपनी मर्यादा होती है और नियमावली होती है, जिसके अनुसार ही संचालन होता है। किसी भी तरह का अमानवीय या असभ्य व्यवहार उचित नहीं है।
यह व्यवहार यह दर्शाता है कि राजद की पार्टी किस प्रकार की है और उनके अंदर मौजूद लोग किस मानसिकता के हैं। पिछले दो दिनों से जिस तरह की भाषाई मर्यादा का उल्लंघन किया जा रहा है, यह बताता है कि वे कितना सजग और जनता के हित के लिए काम करने वाले हैं। वह लोग दरअसल दलित विरोधी हैं इनको यह पचता नहीं है कि प्रदेश का जो 20% आबादी दलितों की है वह मुखर हो रहा है अति पिछड़ा और अल्पसंख्यक मुखर हो रहा है।
इधर, राजद एमएलसी सुनील सिंह ने विधान परिषद में हुए हंगामे पर से कहा, ‘सत्ता के लोग हमलोग पर हावी होना चाहते हैं। बिहार में विधि व्यवस्था बिगड़ी हुई थी। हमलोग चर्चा चाहते थे। सभापति ने स्वीकृति नहीं दी तो हम लोग नारेबाजी कर रहे थे।’'इसी बीच बिहार सरकार के एक टपोरी मंत्री ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। सदन से हमलोगों के निष्कासन हो गया। मंत्री का ऐसा व्यवहार था कि लग रहा है कि नशे में हो। वो किसी पॉकेटमार की तरह व्यवहार कर रहे थे। ये व्यवहार ठीक नहीं था।'






