1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 07, 2026, 9:32:30 AM
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Bihar News : बिहार के भागलपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु की स्थिति को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। करीब 4.700 किलोमीटर लंबे इस पुल के कई हिस्सों में गंभीर तकनीकी खराबियां पाई गई हैं। विशेषज्ञों की संयुक्त जांच में यह बात सामने आई है कि पुल के पूरे सस्पेंडेड स्पैन यानी स्लैब सेक्शन में दिक्कत मौजूद है। इनमें से दो स्पैन इतने कमजोर पाए गए हैं कि उन्हें तोड़कर दोबारा बनाने की जरूरत बताई गई है, ताकि पुल की उम्र बढ़ाई जा सके और भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
इस मामले को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) डिवीजन, पथ निर्माण विभाग, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और रक्षा मंत्रालय की इकाई सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारियों की संयुक्त बैठक हुई। बैठक में बीआरओ की तकनीकी टीम ने पुल की विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश की। कर्नल समर्थ गुप्ता के नेतृत्व में पहुंची टीम ने पूरे सेतु का तकनीकी एनालिसिस किया, जिसमें कई गंभीर खामियां उजागर हुईं।
जांच के दौरान पाया गया कि पुल के सभी पिलरों की बियरिंग खराब हो चुकी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बियरिंग का एकतरफा घिसाव इस समस्या की मुख्य वजह है। टीम ने पुल के एक्सपेंशन गैप और साइड वॉल का भी निरीक्षण किया। जांच में चार से पांच स्थानों पर साइड वॉल ऊपर-नीचे खिसकी हुई मिली, जिसे भविष्य के लिए खतरनाक संकेत माना गया है।
बीआरओ अधिकारियों ने बताया कि पुल पर ट्रैफिक का दबाव असंतुलित होने के कारण यह स्थिति बनी है। भागलपुर से नवगछिया की ओर जाने वाले भारी और ओवरलोडेड वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है, जबकि दूसरी दिशा से आने वाले वाहनों का वजन अपेक्षाकृत कम होता है। लगातार एक तरफ अधिक भार पड़ने की वजह से पुल का बरारी साइड वाला हिस्सा पूर्व दिशा की तुलना में अधिक झुक गया है।
ब्रिज विशेषज्ञों ने सरकार को सलाह दी है कि जो दो स्पैन सबसे अधिक कमजोर हैं, उन्हें पूरी तरह तोड़कर नए सिरे से बनाया जाए। हालांकि अब अंतिम निर्णय सरकार को लेना है कि फिलहाल केवल क्षतिग्रस्त स्लैब की मरम्मत कराई जाए या फिर सभी कमजोर हिस्सों को एक साथ तोड़कर व्यापक स्तर पर पुनर्निर्माण कराया जाए।
सूत्रों के अनुसार अगले दो से चार दिनों में इस पूरे मामले पर तस्वीर साफ हो सकती है। इसी बीच बीआरओ ने संभावित निर्माण कार्य की तैयारी भी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि यदि सरकार से मंजूरी मिलती है तो दोनों क्षतिग्रस्त स्लैब को हटाने का काम तत्काल शुरू किया जाएगा।
पुल निर्माण निगम भी बीआरओ के सहयोग से आधुनिक संसाधनों और तकनीकी मदद का उपयोग करने की तैयारी में जुट गया है। अब यह तय किया जाएगा कि पुल की मरम्मत बेली ब्रिज मॉडल पर होगी या स्टील पाइल ब्रिज तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
बुधवार को विशेषज्ञों की टीम ने एक बार फिर दोनों तरफ से टूटे स्लैब के किनारों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निर्माण तकनीक को लेकर भी सवाल खड़े हुए। टीम ने पाया कि दोनों ओर स्लैब को टिकाने के लिए केवल एक से डेढ़ फीट की जगह छोड़ी गई थी, जबकि मानकों के अनुसार यह जगह कम से कम पांच फीट होनी चाहिए थी। विशेषज्ञों ने इसे निर्माण की बड़ी तकनीकी कमजोरी बताया।
विक्रमशिला सेतु भागलपुर और कोसी-सीमांचल क्षेत्र को जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण पुल है। ऐसे में इसकी मरम्मत और मजबूती को लेकर सरकार और संबंधित एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। अब लोगों की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि इस पुल पर लाखों लोगों की आवाजाही निर्भर करती है।