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Bihar News : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिहार सरकार का आदेश ! ओबरा के पूर्व विधायक सोम प्रकाश सिंह की पेंशन और सभी सुविधाएं बंद; जानिए क्या है वजह

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा एक्शन हुआ है। ओबरा के पूर्व विधायक सोम प्रकाश सिंह की पेंशन और सभी सरकारी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गई हैं। विधानसभा सचिवालय के आदेश के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated May 23, 2026, 10:35:39 AM

Bihar News : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिहार सरकार का आदेश ! ओबरा के पूर्व विधायक सोम प्रकाश सिंह की पेंशन और सभी सुविधाएं बंद; जानिए क्या है वजह

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Bihar News : औरंगाबाद की राजनीति में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब बिहार विधानसभा सचिवालय ने ओबरा के पूर्व विधायक सोम प्रकाश सिंह की पेंशन और सभी सरकारी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद उठाए गए इस प्रशासनिक कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। विधानसभा सचिवालय के अवर सचिव द्वारा महालेखाकार कार्यालय, पटना को भेजे गए आधिकारिक पत्र में साफ तौर पर निर्देश दिया गया है कि पूर्व विधायक को अब किसी भी प्रकार की वित्तीय या सरकारी सुविधा नहीं दी जाएगी।


जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील संख्या 5652/2014 में 28 जनवरी 2026 को अहम फैसला सुनाया था। इसी फैसले और राज्य सरकार से प्राप्त विधिक राय के आधार पर बिहार विधानसभा सचिवालय ने यह निष्कर्ष निकाला कि सोम प्रकाश सिंह को विधानसभा का वैध सदस्य नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि विधायक पद से जुड़ी पेंशन, भत्ता और अन्य सभी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।


इस फैसले के सामने आते ही औरंगाबाद से लेकर पटना तक राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्रशासनिक विभागों में भी हलचल बढ़ गई है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि रिकॉर्ड अपडेट करते हुए पूर्व विधायक को दी जा रही सभी सुविधाओं को पूरी तरह बंद किया जाए। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले का असर कई अन्य राजनीतिक मामलों पर भी पड़ सकता है।


पूरा मामला वर्ष 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। उस समय सोम प्रकाश सिंह ने औरंगाबाद जिले के ओबरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की थी। लेकिन चुनाव के बाद उनके खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। आरोप लगाया गया कि चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने दारोगा पद से इस्तीफा जरूर दिया था, लेकिन विभागीय कार्रवाई लंबित रहने के कारण उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था। ऐसे में वे तकनीकी रूप से सरकारी सेवा में बने हुए थे।


तत्कालीन जदयू नेता और चुनाव में उनके प्रतिद्वंद्वी रहे प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने अदालत में चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि सोम प्रकाश सिंह ने सरकारी नौकरी में रहते हुए चुनाव लड़ा और नामांकन के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया। मामला पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। वर्षों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाते हुए उनके चुनाव को वैध नहीं माना।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब बिहार विधानसभा सचिवालय ने भी सख्त रुख अपनाया है। विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जब किसी व्यक्ति की सदस्यता ही वैध नहीं मानी गई, तो उसे पूर्व विधायक के रूप में मिलने वाली सुविधाओं का लाभ भी नहीं दिया जा सकता। इसी आधार पर पेंशन सहित सभी सरकारी सुविधाएं रोकने का निर्णय लिया गया।


इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में उन उम्मीदवारों के लिए बड़ा संदेश साबित होगा, जो सरकारी सेवा या अन्य संवैधानिक नियमों से जुड़े तथ्यों को छिपाकर चुनावी मैदान में उतरते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा।


फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर आदेश लागू कर दिया गया है और संबंधित विभाग आगे की कार्रवाई में जुट गए हैं। वहीं, इस फैसले के बाद ओबरा समेत पूरे औरंगाबाद जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर नजर बनाए हुए है। बिहार की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक गरमा सकता है।