ब्रेकिंग
घर के बाहर खेल रही चार साल की मासूम को मारी गोली, सिर के आर-पार हुई बुलेट; हालत नाजुकबिहार के तीन लापरवाह थानेदार पर गिरी गाज, एसपी ने ले लिया बड़ा एक्शन; पुलिस महकमे में मचा हड़कंपपटना में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ फिर गरजेगा जिला प्रशासन का बुलडोजर, इस दिन से शुरू होगा विशेष अभियान‘JDU को अब कार्यकारी अध्यक्ष की जरूरत नहीं’, पूर्व सांसद आनंद मोहन का बड़ा बयानहर्ष फायरिंग केस में बुरे फंसे जीतनराम मांझी के करीबी, HAM प्रवक्ता दानिश रिजवान के खिलाफ केस दर्जघर के बाहर खेल रही चार साल की मासूम को मारी गोली, सिर के आर-पार हुई बुलेट; हालत नाजुकबिहार के तीन लापरवाह थानेदार पर गिरी गाज, एसपी ने ले लिया बड़ा एक्शन; पुलिस महकमे में मचा हड़कंपपटना में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ फिर गरजेगा जिला प्रशासन का बुलडोजर, इस दिन से शुरू होगा विशेष अभियान‘JDU को अब कार्यकारी अध्यक्ष की जरूरत नहीं’, पूर्व सांसद आनंद मोहन का बड़ा बयानहर्ष फायरिंग केस में बुरे फंसे जीतनराम मांझी के करीबी, HAM प्रवक्ता दानिश रिजवान के खिलाफ केस दर्ज

Radha Ashtami: कब है राधा अष्टमी, सुख-समृद्धि की देवी राधा रानी के पूजन का विशेष पूजा विधि जानें

हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के अगले दिन राधा अष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन राधा रानी की पूजा करके सुख, समृद्धि और नवसंचार की कामना करते हैं।

Radha Ashtami
Radha Ashtami
© Radha Ashtami
User1
|
|AMP
विज्ञापन — Rectangle

Radha Ashtami: हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस पावन दिन पर राधा रानी की पूजा की जाती है और भक्त व्रत रखकर मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। राधा रानी को सुख, समृद्धि, और नवसंचार की देवी माना जाता है। उनके भक्त उन्हें ही कृष्ण के रूप में पूजते हैं।


राधा रानी का महत्व

सनातन शास्त्रों में राधा रानी को द्वापर युग की महत्त्वपूर्ण संगिनी और भगवान कृष्ण की आत्मसंगिनी बताया गया है। यह कहा जाता है कि राधा और कृष्ण अभिन्न हैं। राधा रानी के कई नाम हैं, जिनमें "किशोरी जी" विशेष है। क्या आप जानते हैं कि उन्हें किशोरी जी क्यों कहा जाता है? इसके पीछे एक अद्भुत कथा है।


किशोरी जी कहलाने की कथा

यह कथा ऋषि कहोड़ और उनकी पत्नी सुजाता के पुत्र अष्टावक्र से जुड़ी है। कहते हैं, अष्टावक्र ने अपने ज्ञान और भक्ति के माध्यम से शास्त्रार्थ के क्षेत्र में ख्याति पाई। उनके जीवन में एक घटना का उल्लेख मिलता है, जब वे बरसाने पहुंचे। उनके विकृत रूप को देखकर वहां के लोग उनका उपहास उड़ाने लगे।

अष्टावक्र ने अपनी योग शक्ति से उन्हें पत्थर बना दिया। इस दौरान राधा रानी और भगवान कृष्ण भी वहां उपस्थित थे। राधा रानी की मुस्कान देखकर अष्टावक्र क्रोधित हो गए। लेकिन जब उन्होंने मुस्कान का कारण पूछा, तो राधा रानी ने कहा, “मैं तो आपमें जगत के पालनहार को देख रही हूं।”

यह सुनकर अष्टावक्र प्रसन्न हो गए और राधा रानी को ताउम्र किशोरी बने रहने का वरदान दिया। इसी कारण से उन्हें "किशोरी जी" के नाम से जाना जाता है।


पूजा का महत्व

राधा अष्टमी पर भक्तजन व्रत रखकर राधा रानी की पूजा करते हैं। यह माना जाता है कि इस दिन उनकी आराधना करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

राधा अष्टमी का यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह प्रेम, भक्ति और त्याग का प्रतीक भी है। इस दिन राधा-कृष्ण के प्रेम को स्मरण कर जीवन में पवित्रता और सद्भावना का संदेश मिलता है।

इस राधा अष्टमी पर, आइए हम सभी राधा रानी की कृपा से अपने जीवन को आलोकित करें।

इस खबर के बारे में

रिपोर्टर / लेखक

User1

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

विज्ञापन

संबंधित खबरें