Money rules Chanakya: आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में बताया है कि धन का उपयोग सोच-समझकर और विवेक के साथ करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि भले ही कोई कितना भी अपना या करीबी क्यों न हो, अगर वह गुणहीन है, तो उसे धन देना हानिकारक होता है।
चाणक्य का मानना है कि धन हमेशा उन लोगों को ही देना चाहिए जो गुणवान और योग्य हों। ठीक वैसे ही जैसे बादल समुद्र से पानी लेकर पूरी धरती पर जीवनदायी वर्षा करता है और अंततः वह जल फिर समुद्र में लौट आता है। इसी तरह, अगर कोई योग्य व्यक्ति धन पाता है, तो वह उससे न सिर्फ स्वयं का भला करता है, बल्कि समाज का भी कल्याण करता है और अंततः वही धन कई गुना होकर मदद करने वाले के पास भी लौट सकता है।
वहीं, अगर धन को ऐसे लोगों को दे दिया जाए जो नालायक या गलत प्रवृत्ति के हैं, तो वह धन व्यर्थ चला जाता है और उससे किसी का भला नहीं होता। इससे धन की हानि भी होती है और मानसिक शांति भी भंग होती है।
चाणक्य आगे कहते हैं कि कमाए गए धन की रक्षा करने का सबसे अच्छा तरीका है उसका उचित उपयोग करना। जैसे तालाब का पानी अगर रुका रहे तो गंदा हो जाता है, पर बहता रहे तो साफ रहता है, उसी तरह धन को अच्छे कार्यों में लगाते रहना चाहिए। यह न केवल धन की शुद्धता बनाए रखता है बल्कि व्यक्ति को लोभ, अहंकार और बुराइयों से भी बचाता है।
धन का उपयोग योग्य और गुणवान लोगों की मदद में ही करना चाहिए।
अगुणी या गलत लोगों को धन देना हानिकारक है, भले ही वे कितने भी करीबी क्यों न हों।
धन को अच्छे कार्यों में खर्च करना ही उसकी असली रक्षा है।
जरूरतमंद लेकिन योग्य लोगों की सहायता से समाज और स्वयं का भी लाभ संभव है।




