1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 17, 2026, 2:49:56 PM
- फ़ोटो sansad tv
Lalan Singh speech: लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान जनता दल यूनाइटेड के नेता और पंचायती राज मंत्री ललन सिंह ने जोरदार संबोधन दिया।
उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत बिहार की राजनीति के उदाहरण से करते हुए कहा कि वर्ष 2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद 2006 में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था।
ललन सिंह ने दावा किया कि उस समय लालू प्रसाद यादव ने इस फैसले का विरोध किया था, जिसका राजनीतिक असर लंबे समय तक देखने को मिला। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव को भी इस मुद्दे पर सावधान रहने की सलाह दी।
सदन में ललन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” रहा है और महिला आरक्षण से जुड़े ये विधेयक इसी सोच के तहत लाए गए हैं। उनका कहना था कि देश की 50 प्रतिशत महिला आबादी को कानून निर्माण की प्रक्रिया में उचित भागीदारी देने के लिए यह कदम जरूरी है।
उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर पहले 33 प्रतिशत आरक्षण था, जिसे कई राज्यों में बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है। अब संसद और विधानसभाओं में भी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यह पहल की जा रही है। उन्होंने 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की मंशा पहले ही स्पष्ट थी और अब उसे लागू करने की दिशा में यह संशोधन विधेयक लाया गया है।
परिसीमन आयोग 2026 विधेयक पर बोलते हुए ललन सिंह ने कहा कि इसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण करना है। उनके अनुसार, सीटों की संख्या बढ़ने से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और आसान हो जाएगा। उन्होंने इस प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
चर्चा के दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि विपक्षी दल सामाजिक बदलाव के ऐसे कदमों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी, लेकिन कांग्रेस उसमें शामिल नहीं हुई। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को जल्दबाजी में लाया गया कदम बताना गलत है, क्योंकि इसकी प्रक्रिया 2023 से चल रही है और पूरी तैयारी के बाद इसे सदन में पेश किया गया है।
अंत में ललन सिंह ने कहा कि यदि देश की आधी आबादी को संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व मिलता है, तो लोकतंत्र और मजबूत होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की महिलाएं इस पहल का समर्थन करेंगी और इसका विरोध करने वालों को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।