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तमिलनाडु में सरकार गठन पर फिर फंसा पेंच: विजय के शपथ पर ग्रहण, VCK ने रख दी बड़ी शर्त; स्टालिन के साथ IUML

Tamil Nadu politics: तमिलनाडु में TVK प्रमुख विजय के मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। राज्यपाल दो दलों के समर्थन पत्र का इंतजार कर रहे हैं, जिससे शपथ की तारीख तय नहीं हो पाई है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated May 08, 2026, 10:14:11 PM

Tamil Nadu politics

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Tamil Nadu politics: तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर सस्पेंस और गहरा गया है। TVK प्रमुख विजय को शनिवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी थी, लेकिन अब शपथ ग्रहण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। जानकारी के अनुसार, राज्यपाल अभी दो राजनीतिक दलों के समर्थन पत्र का इंतजार कर रहे हैं, जिसके कारण शपथ ग्रहण की तारीख और समय की आधिकारिक घोषणा नहीं हो पाई है।


सूत्रों के मुताबिक, VCK और IUML की ओर से समर्थन पत्र अभी तक राज्यपाल को नहीं सौंपा गया है। बताया जा रहा है कि VCK ने समर्थन के बदले उपमुख्यमंत्री पद की मांग रखी है, जबकि IUML का कहना है कि वह एमके स्टालिन के साथ है।


विजय ने राज्यपाल को 116 विधायकों के समर्थन वाला पत्र सौंपा था और कहा था कि बाकी विधायकों के हस्ताक्षर भी जल्द जमा कर दिए जाएंगे। इसी कारण राजभवन दो दलों के समर्थन पत्र का इंतजार कर रहा है।TVK (107 विधायक), कांग्रेस (5) और CPI-CPM (4) के समर्थन का दावा किया गया है।


हालांकि, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK ने 108 सीटें जीती थीं, लेकिन विजय दो सीटों से चुनाव लड़े थे, इसलिए एक सीट छोड़ने के बाद पार्टी के 107 विधायक माने जा रहे हैं। सरकार बनाने के लिए 117 सीटों का बहुमत जरूरी है।


इससे पहले शुक्रवार देर शाम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने विजय को सरकार बनाने का न्योता दिया था। राजभवन में हुई मुलाकात के बाद विजय ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया था। पहले खबरें थीं कि शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी शामिल हो सकते हैं।


फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय ने अपनी पार्टी TVK के जरिए युवाओं, महिलाओं और आम जनता के बीच मजबूत समर्थन हासिल किया है। उनकी राजनीतिक एंट्री ने तमिलनाडु की राजनीति में नई लहर पैदा की है। विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर जनता में नई उम्मीदें देखी जा रही हैं।


TVK ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए मजबूत प्रदर्शन किया है और अब सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को धरातल पर लागू करने की होगी।