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आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ, महागठबंधन का फोकस राजपूत कार्ड को मजबूत करना

PATNA : डेढ़ दशक से जेल में बंद पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ होता दिख रहा है। गोपालगंज के पूर्व डीएम जी कृष्णैय्या हत्याकांड में दोषी करार दिए जाने के बाद आनंद मोहन

आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ, महागठबंधन का फोकस राजपूत कार्ड को मजबूत करना
Mukesh Srivastava
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PATNA : डेढ़ दशक से जेल में बंद पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ होता दिख रहा है। गोपालगंज के पूर्व डीएम जी कृष्णैय्या हत्याकांड में दोषी करार दिए जाने के बाद आनंद मोहन जेल के अंदर उम्र कैद की सजा पूरी कर चुके हैं और अब राज्य सरकार उनकी रिहाई का रास्ता बनाते नजर आ रही है। दरअसल, पिछले हफ्ते कैबिनेट की हुई बैठक में एक एजेंडे पर मुहर लगाई गई थी, इसमें यह कहा गया था कि 26 जनवरी के मौके पर वैसे कैदियों की रिहाई की जाएगी जिनका बर्ताव जेल में रहते हुए कुशल रहा है। माना जा रहा है कि आनंद मोहन को इसी आधार पर जेल से रिहाई मिल सकती है।


आनंद मोहन को जेल से रिहाई मिल जाएगी इस बात के संकेत पिछले दिनों उसी वक्त लग गए थे, जब वे पैरोल पर बाहर आए थे। अपनी बिटिया की सगाई के मौके पर आनंद मोहन को जेल से पैरोल पर बाहर आने की अनुमति मिली थी। इस दौरान आनंद मोहन पटना पहुंचे थे और अपनी बेटी के इंगेजमेंट के मौके पर नीतीश कुमार से लेकर तेजस्वी यादव तक की मेजबानी की थी। नीतीश कुमार और आनंद मोहन के बीच जो दूरियां पिछले कुछ सालों में देखने को मिली उसे इस मौके ने मिटा दिया था। इस दौरान आनंद मोहन अपनी पत्नी लवली आनंद के साथ तमाम राजनीतिक दिग्गजों का स्वागत करते नजर आए थे। पप्पू यादव से भी उनके गिले-शिकवे दूर हो गए थे। सियासी जानकार यह मान रहे थे कि आनंद मोहन के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं क्योंकि बिहार में महागठबंधन की सरकार है। आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद फिलहाल आरजेडी के विधायक हैं और उनकी पत्नी लवली आनंद भी आरजेडी में ही हैं।


सियासी जानकारों की राय में आनंद मोहन की रिहाई महागठबंधन के सियासी प्लान का एक बड़ा हिस्सा हो सकता है। आनंद मोहन जिस राजपूत बिरादरी से आते हैं उसे फिलहाल देशभर में बीजेपी के साथ खड़ा माना जाता है। एक दौर था जब नीतीश कुमार और लालू यादव के साथ राजपूत बिरादरी के वोटर मजबूती से खड़े रहते थे लेकिन बाद में बीजेपी ने इस वोट बैंक पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई। पिछले कुछ अरसे से जेडीयू के अंदर भी राजपूत बिरादरी में जनाधार मजबूत करने के लिए नेता मशक्कत करते नजर आए हैं। जेडीयू एमएलसी संजय कुमार सिंह अपनी बिरादरी के अन्य नेताओं के साथ बिहार भर का दौरा करते दिखे हैं और इस वक्त भी उनका महाराणा प्रताप के कार्यक्रम को लेकर दौरा चल रहा है। संजय सिंह ने राजपूतों के बीच अपनी मजबूत पकड़ भी बनाई है। जेडीयू को इससे फायदा भी मिला है और जानकार मानते हैं कि आनंद मोहन के बाहर आने से महागठबंधन को राजपूत बिरादरी में अपनी पकड़ मजबूत करने में आसानी होगी। हाल के दिनों में पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह जिस तरह नीतीश कुमार पर हमलावर रहे हैं और जगदानंद सिंह के साथ-साथ सुधाकर सिंह के स्टैंड से महागठबंधन को राजपूत बिरादरी में जो नुकसान पहुंचा है, उसका डैमेज कंट्रोल करने में भी आनंद मोहन मददगार साबित हो सकते हैं। अब देखना होगा कि आनंद मोहन की रिहाई कब तक हो पाती है और क्या वाकई उनके बाहर आने का फायदा महागठबंधन को मिल पाता है।

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रिपोर्टर / लेखक

Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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