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सवाल यह नहीं कि आपने क्या त्याग किया… बल्कि यह है कि इसकी चर्चा कौन करे? JDU का छलका दर्द

Bihar Politics: सीएम पद जाने के बाद जेडीयू में दर्द झलक रहा है. पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने नीतीश कुमार के त्याग को ऐतिहासिक बताते हुए उनकी सराहना की है.

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 15, 2026, 12:27:50 PM

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Bihar Politics: दो दशक तक बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन रहे नीतीश कुमार एक झटके में सीएम से पूर्व सीएम बन गए। उनकी पार्टी जेडीयू मौजूदा सरकार में शामिल तो है लेकिन सीएम की कुर्सी जाने का दर्द भी है। पहले जिस ड्राइविंग सीट पर जेडीयू थी अब उस सीट पर बीजेपी आ गई है और जेडीयू पिछली सीट पर चली गई। इसको लेकर जेडीयू नेताओं के मन में टीस जरूर है।


नई सरकार में मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी का शपथ ग्रहण होने के बाद पूर्व मंत्री जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने एक्स पर अपनी भावनाओं को व्यक्ति किया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने जो त्याग किया है वैसा त्याग कोई नहीं कर सकता है। उन्होंने राजनीति में जो मिसाल कायम की ऐसा नेता इतिहास में भी देखने को नहीं मिल सकता है।


नीरज कुमार ने एक्स पर लिखा, “कोई एक दिन के लिए भी त्याग नहीं करता, लेकिन नीतीश कुमार जी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी त्याग कर एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो राजनीति के इतिहास में विरले ही देखने को मिलती हैं। सत्ता को ठोकर मारकर सिद्धांतों को सर्वोपरि रखना—यह हर किसी के बस की बात नहीं। यह साहस, यह चरित्र, यह त्याग—सिर्फ नीतीश कुमार जी जैसे नेता ही दिखा सकते हैं।


जिस बिहार ने विभाजन का दंश झेला, जिसे कभी जंगलराज, भय, नरसंहार, जातीय उन्माद और कुशासन की पहचान बना दिया गया— उसी बिहार को फिर से खड़ा करने का संकल्प किसी साधारण व्यक्ति का नहीं हो सकता। वो दौर —  जब 118 नरसंहारों की गूंज थी, जब “चरवाहा विद्यालय” जैसे प्रयोगों ने शिक्षा का मज़ाक बना दिया था,  जब समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांटकर सत्ता की राजनीति की जाती थी, जब गरीब, दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों को जानबूझकर विकास से दूर रखा गया।


ऐसे अंधकारमय समय में, माननीय नीतीश कुमार जी ने सिर्फ सरकार नहीं चलाई — उन्होंने व्यवस्था बदली, सोच बदली, समाज को नई दिशा दी। यह वही नेता हैं, जिन्होंने केंद्र में श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी की कैबिनेट में अपनी भूमिका निभाई और बिहार लौटकर विकास की नई परिभाषा गढ़ी।


मुख्यमंत्री, सांसद या विधायक बन जाना बड़ी उपलब्धि नहीं है— लेकिन सामाजिक जकड़नों को तोड़ना, भविष्य की पीढ़ियों के लिए रोडमैप बनाना और उसे जमीन पर उतारना यह असाधारण व्‍यक्तित्‍व का व्‍यक्ति ही कर सकता है। 21 वर्षों की बिहार की राजनीति में कितने ही उतार-चढ़ाव आए लेकिन एक चीज़ कभी नहीं बदली— जनता के प्रति समर्पण और बिहार के विकास का अटूट संकल्प।


और जब वक्त आया तो कुर्सी से मोह नहीं, बल्कि जनता के प्रति समर्पण। यही कारण है कि “सात निश्चय” केवल योजना नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य का विजन है—आशा ही नहीं, यह बिहार की जनता की स्पष्ट अपेक्षा और दृढ़ मांग है कि माननीय नीतीश कुमार जी द्वारा तैयार किया गया विकास का रोडमैप—“सात निश्चय पार्ट-3”—बिना किसी छेड़छाड़ के, बिना किसी भटकाव के, लगातार और पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ता रहे।


आज जो लोग सवाल उठाते हैं उन्हें इतिहास के आईने में खुद को देखना चाहिए—क्योंकि फर्क साफ है—  एक तरफ सत्ता के लिए समाज को बांटने की राजनीति और दूसरी तरफ समाज को जोड़ने की कार्यनीति। आपका योगदान महान है,  लेकिन आपका त्याग—उससे भी बड़ा”।