Bihar Politics: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे विशेष मतदाता सूचि पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। विपक्ष इसे एनडीए सरकार की साजिश बता रहा है। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शुक्रवार को महागठबंधन के नेताओं के साथ राज्य निर्वाचन आयोग पहुंचे और लिस्ट पुनरीक्षण कार्य पर आपत्ति जताई।
दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जा रहे विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम 2025 कोलेकर बिहार की सियासत में नया विवाद छिड़ गया है। एक तरफ जहां सत्ताधारी दल इसका समर्थन कर रहे हैं तो वहीं विपक्ष ने इसा बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार और चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश शुरू कर दी है।
बिहार में हो रहे मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण पर विपक्ष लगातार आपत्ति जता रहा है। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने बीते बुधवार को नई दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर में पहुंच कर अपना ज्ञापन सौंपा। इस दौरान राजद, कांग्रेस, CPI, CPM, सीपीआई माले, सपा समेत 11 पार्टियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बातें रखी।
बिहार में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पहले यह आरोप लगा चुके हैं कि मतदाता सूचि पुनरीक्षण के नाम पर चुनाव आयोग गरीबों का नाम मतदाता सूची से हटा रहा है। तेजस्वी यहां तक आरोप लगा चुके हैं कि चुनाव आयोग बीजेपी के एजेंट के रूप में काम कर रहा है। और गरीबों का हक मारने की कोशिश की जा रही है। तेजस्वी ने कहा था कि हार डर के चलते चुनाव आयोग को आगे करके बीजेपी पीछे से यह सारा खेल खेल रही है।
शुक्रवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद तेजस्वी यादव गठबंधन के नेताओं के साथ राज्य निर्वाचन आयोग के दफ्तर पहुंचे और विशेष मतदाता सूचि पुनरीक्षण कार्य पर आपत्ति जताई। इस दौरान तेजस्वी के साथ वीआईपी चीफ मुकेश सहनी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के अलावे गठबंधन के कई नेता मौजूद रहे।

