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Bihar Politics: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की वकील बनीं JDU नेता संजय झा की दोनों बेटियां, छिड़ गया नया सियासी घमासान

Bihar Politics: बिहार में राजनीतिक घमासान तब और बढ़ गया जब जेडीयू नेता संजय झा की दोनों बेटियों को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का वकील बनाए जाने पर विपक्ष ने सवाल उठाए। आरजेडी ने इसे दलितों-पिछड़ों के अधिकारों की अनदेखी बताया है।

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बिहार में छिड़ गया नया विवाद
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Mukesh Srivastava
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Bihar Politics: बिहार सरकार द्वारा पिछले दिनों विभिन्न आयोगों का गठन किया गया है। इन आयोगों में मंत्रियों और नेताओं के रिश्तेदारों को जगह मिलने के बाद बिहार की सियासत गरमाई हुई है। विपक्ष इसको लेकर लगातार सरकार पर हमलावर बना हुआ है। इसी बीच जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की दोनों बेटियों को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की वकील बनाए जाने पर नया विवाद छिड़ गया है।


दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए नेताओं के रिश्तेदारों को नीतीश सरकार के आयोगों में जगह दिए जाने के बाद सियासी घमासान छिड़ गया है। केंद्रीय मंत्रियों और बिहार सरकार के मंत्रियों के रिश्तेदारों का आयोगों के पदों पर मनोनयन के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तो यहां तक कह दिया था कि नीतीश सरकार को चाहिए कि वह एक जमाई आयोग का भी गठन कर दे।


इसी बीच विपक्ष को एक और नया मुद्दा हाथ लग गया है। आरजेडी ने जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की बेटियों को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की वकील बनाए जाने पर सवाल उठाए हैं। आरजेडी ने केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश की कॉपी को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर शेयर करते हुए तीखा पोस्ट किया है और दलितों, पिछड़ों और अति पिछड़ों की हकमारी करने का आरोप लगाया है।


आरजेडी ने एक्स पर लिखा, “जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय झा जी की दोनों सुपुत्रियों को सुप्रीम कोर्ट में एक ही दिन 𝐆𝐫𝐨𝐮𝐩-‘𝐀’ 𝐏𝐚𝐧𝐞𝐥 𝐂𝐨𝐮𝐧𝐬𝐞𝐥  बनवा दिया जाता है जिन्हें कोई विशेष कार्य अनुभव भी नहीं है। जदयू के कितने दलित, पिछड़े और अतिपिछड़े नेताओं, सांसदों, मंत्रियों अथवा कार्यकर्ताओं के बेटे-बेटियों को यह विशेषाधिकार प्राप्त है कि एक ही दिन में बिना अनुभव के यह उपलब्धि प्राप्त कर लें। लेकिन पिछड़े-अतिपिछड़े और दलित इसलिए ही तो वंचित ठहरे? दलितों-पिछड़ों-अतिपिछड़ों की मेरिट, प्रतिभा, हक़ और अधिकार को कैसे छिनकर भी कुछ लोग बेशर्मी से जन्मजात श्रेष्ठ और मेरिटधारी बने रहने का स्वांग रचते है यह इसका क्लासिकल उदाहरण है”।


बता दें कि केंद्र और राज्य सरकारें जिला से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक वकीलों की सेवा लेती है और उन्हें सरकारी वकील के तौर पर अदालतों में तैनात किया जाता है। ठीक उसी तरह से कानून मंत्रालय ने 9 अक्टूबर 2024 के एक आदेश के तहत केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने के लिए संजय झा की दोनों बेटियों अद्या झा और सत्या झा की सेवा तीन साल के लिए ली गई है। दोनों की सेवा वकीलों के ग्रुप ए पैनल में ली गई है। इसको लेकर बिहार की सियासत में नया घमासान छिड़ गया है।

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रिपोर्टर / लेखक

Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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